Bangladesh Unrest: न हाथों में बांध पा रहे रक्षासूत्र, न ही लगा पा रहे तिलक; खामोशी के साये में हो रही पूजा

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा के साथ ही वहां के मंदिरों में भी खामोशी के साये में देवों की पूजा हो रही है। घंटे-घड़ियाल और शंखनाद की गूंज भी वहां थम गई है। मंदिरों में चारों पहर की आरती और पूजा नहीं हो पा रही है। जिन इलाकों में हिंसा का प्रभाव ज्यादा है, वहां के मंदिरों में पूजा-पाठ पूरी तरह से ठप है। जान बचाने के लिए मंदिरों के महंत, पुजारी अपनी पहचान छिपाने को मजबूर हैं। न तिलक लगा पा रहे हैं और न ही हाथों में रक्षा बांध रहे हैं। बांग्लादेश के चटगांव के स्वयंभू मंदिर के पुजारी ने भक्तों को फोन ये जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि वहां मंदिरों में चारों पहर की आरती बंद है। चरमपंथी हमेशा चक्रमण करते रहते हैं। बचकर ही पूजा-पाठ की जा रही हैं। हिंदू संगठन के पदाधिकारी अशोक ने फोन पर बताया कि हमले के डर से हर कोई छिपकर रह रहा है। खासकर मंदिरों के महंत, पुजारी इलाकों में न तो तिलक लगाकर निकलते हैं और न ही हाथों में रक्षासूत्र बांधकर। सबसे प्रसिद्ध ढांकेश्वरी देवी मंदिर में भी दर्शन-पूजन में समस्याएं हो रही हैं। इंटरनेशनल वेदांत सोसाइटी के अनुयायी गौतम ने फोन पर बताया कि भजन-कीर्तन पूरी तरह से बंद है। पूजा में शंख वादन भी बंद है। काशी में गुरु के जन्मोत्सव में शामिल होने आए स्वामी निर्गुणानंद ने बताया कि जबसे वहां का माहौल खराब हुआ है, अनुयायियों ने यहां आना बंद कर दिया है। इसे भी पढ़ें;बरतें सावधानी: बिना प्यास भी पीएं पानी, हार्ट अटैक का खतरा होगा कम; बीएचयू के डॉक्टरों ने दी खास सलाह

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 08, 2026, 16:58 IST
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