कट्टर सोच: यह इंतिफादा का वैश्वीकरण, ऑस्ट्रेलिया में हुआ हमला सात अक्तूबर की याद दिलाता है

सिडनी के बोंडी तट पर हनुक्का इवेंट में रविवार को हुए आतंकवादी हमले, जिसमें कम से कम 15 लोग मारे गए तथा कई और घायल हुए, में एक नायक भी सामने आया। खबरों में एक आदमी का उल्लेख किया गया है, जिसका नाम अहमद अल अहमद बताया जा रहा है और वह एक स्थानीय दुकानदार है। हालांकि, अभी पुष्टि नहीं हो पाई है, लेकिन बताया जा रहा है कि उसने अकेले ही दो आतंकवादियों में से एक को निहत्था कर दिया एवं दो बार गोली लगने के बाद भी बच गया। यह पूरा वाकया कैमरे में कैद हो गया और तब से उसका वीडियो वायरल हो गया है। उस व्यक्ति की बहादुरी ने न केवल कई लोगों की जानें बचाईं, बल्कि यह इस बात की भी एक जरूरी याद दिलाता है कि इन्सानियत हमेशा सांस्कृतिक और धार्मिक सीमाओं को पार कर सकती है। लेकिन हनुक्का नरसंहार ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की सरकार की देश के यहूदी समुदाय की सुरक्षा करने में लगातार नाकामी को भी दिखाता है। इससे पहले अक्तूबर 2024 में भी, बोंडी में एक कोशर रेस्टोरेंट पर आगजनी करके हमला किया गया था; छह हफ्ते बाद, एक यहूदी प्रार्थना स्थल पर पेट्रोल बम से हमला किया गया। उन हमलों का आरोप ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स पर लगाया गया था, और अल्बनीज सरकार ने इसकी प्रतिक्रिया में कैनबरा में ईरानी राजदूत को देश से निकाल दिया और तेहरान में अपना दूतावास बंद कर दिया। ऑस्ट्रेलिया के लिए दुखद बात यह है कि वहां सिर्फ विदेशी लोग ही समस्या नहीं हैं। पिछले साल, यहूदी-विरोधी भावना से लड़ने के लिए सरकार के विशेष दूत जिलियन सेगल ने चेतावनी दी थी कि यहूदी-विरोधी व्यवहार न केवल कई परिसरों में मौजूद है, बल्कि यह संस्कृति का एक हिस्सा बन गया है। सात अक्तूबर को इस्राइल में हुए हमास के हमले के बाद ग्रीन्स पार्टी की विधायक जेनी लियोंग ने एक बयान जारी कर यहूदी लॉबी और जायोनी लॉबी पर आरोप लगाया कि उनके हाथ-पैर जातीय समूहों के हर पहलू में घुसपैठ कर रहे हैं। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यहूदी एक धर्म है, जिसे मानने वाले लोग भी यहूदी कहलाते हैं, जबकि जायोनिज्म इस्राइल में यहूदी मातृभूमि के लिए एक राजनीतिक आंदोलन है; सभी यहूदी जायोनिस्ट नहीं हैं। तोड़फोड़ करने वालों तथा आग लगाने वालों ने यहूदी घरों, मोहल्लों और एक डे केयर सेंटर को निशाना बनाया है। ऑस्ट्रेलिया के एक शीर्ष खुफिया अधिकारी के अनुसार, रविवार के हमले में शामिल कथित हमलावरों में से कम से कम एक को अधिकारी जानते थे, लेकिन उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि इससे खतरा हो सकता है। जब मैं जून, 2024 में आखिरी बार ऑस्ट्रेलिया गया था, तो मैंने यहूदी समुदाय के नेताओं से बहुत सारी चिंताएं सुनीं, लेकिन कुछ भी बदलता हुआ नहीं दिखा। रविवार को, ऑस्ट्रेलियाई यहूदी एसोसिएशन ने फेसबुक पर एक संदेश पोस्ट किया: हमने सरकार को कितनी बार चेतावनी दी हमें एक बार भी ऐसा महसूस नहीं हुआ कि उन्होंने हमारी बात सुनी। वे शायद अब सुन रहे होंगे। लेकिन अल्बनीज सरकार के लिए समस्या यह है (जिसने सितंबर में एक फलस्तीनी राज्य को मान्यता दी थी और गाजा में इस्राइली कार्रवाई की खुलकर निंदा की है) कि इस्राइल को लगातार बुरा बताने और उन यहूदियों पर हमले करने के बीच नैतिक सीमा स्पष्ट नहीं है, जिनके बारे में माना जाता है कि वे इस्राइल का समर्थन करते हैं। रविवार को अल्बनीज ने कहा कि आज बोंडी बीच पर जो हमला हुआ है, वह समझ से परे है। असल में, यह पूरी तरह समझने लायक है। उन कट्टरपंथियों के लिए, जिन्हें यह विश्वास दिलाया गया है कि यहूदी देश बुराई की पराकाष्ठा हंै, यहूदियों को मारना न्याय की एक विकृत सोच है। भले ही पीड़ित निहत्थे नागरिक हों। भले ही वे कोई प्राचीन खुशी का त्योहार मना रहे हों। इस घटना का एक बड़ा सबक है, जिसके मायने ऑस्ट्रेलिया से परे भी है। हालांकि, आने वाले हफ्तों में हमें रविवार के हत्यारों की सोच के बारे में शायद और भी बहुत कुछ पता चलेगा, लेकिन यह अंदाजा लगाना सही होगा कि वे जो कर रहे थे, उसे वे इंतिफादा का वैश्वीकरण समझ रहे थे। यानी, वे दिल से मानते रहे थे कि विरोध जायज है और चाहे किसी भी तरह से हो, जरूरी है, जो दुनिया भर में इस्राइल विरोधी रैलियों में आम हो गए हैं। जो लोग ये बातें बोलते हैं, उनमें से कई लोगों के लिए ये बातें शायद अमूर्त और रूपक जैसी लग सकती हैं, यानी फलस्तीनी आजादी के पक्ष में एक राजनीतिक रवैया, न कि अपने कथित दुश्मनों को मारने की कोई अपील। जब मैं यरूशलेम में रहकर पत्रकारिता कर रहा था, तो मुझे पता चला कि इंतिफादा शब्द का असली मतलब क्या होता है। अरबी में इसका शाब्दिक अर्थ है-विद्रोह। मैं उस समय रेहाविया इलाके में एक अपार्टमेंट में शिफ्ट ही हुआ था, जब मार्च 2002 में मेरे स्थानीय कॉफी शॉप, कैफे मोमेंट पर एक आत्मघाती बम हमला हुआ। उस वक्त मेरी पत्नी भी वहां आने वाली थी, लेकिन उसने आखिरी वक्त में अपना फैसला बदल दिया था। उस रात ग्यारह लोगों की हत्या हुई और 54 लोग घायल हुए। हमास के कई हमलावरों को गिरफ्तार किया गया और फिर नौ साल बाद इस्राइली बंधक गिलाद शालित के बदले में रिहा कर दिया गया। सात अक्तूबर, 2023 को हत्या, बलात्कार और अपहरण की भयानक घटना से पहले भी दुनिया भर में इंतिफादा फैल रहा था। 2006 में सिएटल में यहूदी फेडरेशन के ऑफिस में एक हमलावर ने एक महिला की हत्या कर दी और पांच अन्य लोगों को घायल कर दिया। हमलावर ने चश्मदीदों से कहा कि वह इस्राइल से नाराज था। 2015 में पेरिस में एक कोशर मार्केट में चार यहूदियों की हत्या कर दी गई। मई में वाशिंगटन के कैपिटल ज्यूइश म्यूजियम से निकलने के बाद एक युवा जोड़े की हत्या एक ऐसे हत्यारे ने कर दी, जो स्वतंत्र फलस्तीन के नारे लगा रहा था। एक बुजुर्ग अमेरिकी महिला करेन डायमंड कोलोराडो में बम हमले की शिकार हुई थीं और उनकी मृत्यु हो गई। उस हमले में कम से कम 12 अन्य लोग भी घायल हुए थे। हमलावर स्वतंत्र फलस्तीन के नारे लगा रहा था। ये कट्टर सोच वाले लोग होते हैं, जो मानते हैं कि उनके विचारों के असल दुनिया में नतीजे होने चाहिए। रविवार को, वे नतीजे यहूदी खून से लिखे गए थे। इतिहास बताता है कि यह आखिरी बार नहीं होगा।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 16, 2025, 06:28 IST
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