अटल बिहारी वाजपेयी: सवेरा है मगर पूरब दिशा में घिर रहे बादल

सवेरा है मगर पूरब दिशा में घिर रहे बादल रूई से धुँधलके में मील के पत्थर पड़े घायल ठिठके पाँव ओझल गाँव जड़ता है न गतिमयता स्वयं को दूसरों की दृष्टि से मैं देख पाता हूँ न मैं चुप हूँ न गाता हूँ समय की सर्द साँसों ने चिनारों को झुलस डाला मगर हिमपात को देती चुनौती एक द्रुममाला बिखरे नीड़ विहँसी चीड़ आँसू हैं न मुस्कानें हिमानी झील के तट पर अकेला गुनगुनाता हूँ न मैं चुप हूँ न गाता हूँ हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 24, 2025, 14:29 IST
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