MP: डिजिटल अरेस्ट के नाम पर बैतूल में दूसरी बड़ी साइबर ठगी, सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी से 23.50 लाख की धोखाधड़ी

मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। बीते एक माह के भीतर यह दूसरी बड़ी घटना है, जिसमें ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस बताकर एक सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी को निशाना बनाया और लाखों रुपये की ठगी कर ली। दिल्ली पुलिस बनकर आया फोन कॉल जानकारी के अनुसार, बैतूल निवासी सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी बसंत कुमार मेदमवार के मोबाइल पर एक कॉल आया, जिसकी कॉलर आईडी पर दिल्ली पुलिस लिखा हुआ था। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड से खरीदी गई सिम का इस्तेमाल बड़े साइबर अपराध में किया गया है। डर और दबाव बनाकर की गई मानसिक निगरानी ठगों ने यह भी दावा किया कि उनके नाम से दिल्ली और मुंबई में बैंक खाते संचालित हो रहे हैं और उनके घर में रखा सोना भी संदिग्ध है। कानूनी कार्रवाई का भय दिखाकर उन्हें मानसिक दबाव में ले लिया गया और लगातार तीन दिनों तक फोन व वीडियो कॉल के जरिए निगरानी में रखा गया, जिसे डिजिटल अरेस्ट कहा जाता है। 23.50 लाख रुपये की ट्रांसफर, बैंक में खुली पोल ठगों के निर्देश पर बसंत कुमार मेदमवार ने दो किश्तों में कुल 23 लाख 50 हजार रुपये बताए गए खातों में ट्रांसफर कर दिए। शेष रकम के लिए उन्हें बैंक जाकर गोल्ड लोन लेने को कहा गया। बैंक में कॉल पर निर्देश लेते देख ब्रांच मैनेजर को संदेह हुआ और तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। समय रहते टली और बड़ी ठगी सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बुजुर्ग को समझाया कि वे किसी सरकारी एजेंसी के नहीं, बल्कि साइबर ठगों के संपर्क में हैं। पुलिस ने तुरंत गोल्ड लोन की प्रक्रिया रुकवाई और तीन दिन से चल रही डिजिटल अरेस्ट की स्थिति समाप्त कराई, हालांकि तब तक ठग बड़ी राशि हड़प चुके थे। यह भी पढ़ें-बाबा महाकाल:भस्म आरती में शामिल हुईं अभिनेत्री निमरत कौर, बोलीं- जितना सुना था, उससे कहीं अधिक अद्भुत अनुभव पीड़ित की आपबीती और अपील पीड़ित बसंत कुमार मेदमवार ने बताया कि साइबर ठग ट्रूकॉलर पर परिचित नाम से कॉल करते हैं, जिससे लोग भरोसा कर लेते हैं। इसके बाद वे पुलिस या जांच एजेंसी बनकर डराते हैं और डिजिटल अरेस्ट की बात करते हैं। उन्होंने लोगों से ऐसी कॉल पर भरोसा न करने और तुरंत पुलिस को सूचना देने की अपील की है। डीएसपी शैफा हासमी ने बताया कि फरियादी को डिजिटल अरेस्ट के नाम पर मानसिक रूप से बंधक बनाकर 23 लाख 50 हजार रुपये की ठगी की गई। गोल्ड लोन के जरिए और राशि निकलवाने का प्रयास किया गया, जिसे बैंक और पुलिस की सतर्कता से रोक दिया गया। मामले में बीएनएस की धारा 318(4) और 308 के तहत अपराध दर्ज कर जांच की जा रही है। पुलिस की नागरिकों से अपील पुलिस ने आम नागरिकों से कहा है कि किसी भी सरकारी एजेंसी के नाम से आने वाले फोन कॉल से घबराएं नहीं। पुलिस, सीबीआई या कोई भी विभाग फोन पर गिरफ्तारी, डिजिटल अरेस्ट या पैसों की मांग नहीं करता। ऐसे मामलों में तुरंत 112 या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 06, 2026, 21:54 IST
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