Amar Ujala Medhavi Award: बच्चों की कामयाबी देख गर्व से खिले मां-बाप के चेहरे, टॉपर्स ने साझा किए सक्सेस टिप्स

बेटियों के हाथ में मेडल और प्रमाणपत्र थे जबकि उनके साथ पहुंचे पिताओं के चेहरों पर खुशी और गर्व साफ नजर आ रहा था। सम्मान समारोह में बच्चों के साथ पहुंचे अभिभावकों के लिए भी यह दिन खास रहा। किसी ने भरोसे को ताकत बताया तो किसी ने अनुशासन को सफलता की कुंजी माना। पेशे से शिक्षक गुलजार अहमद (ऐशमुकाम से) के लिए यह दिन इसलिए खास रहा क्योंकि उनकी बेटी फलक गुलजार ने 12वीं विज्ञान में 99 फीसदी अंक हासिल किए हैं। वह अब डॉक्टर बनने के लिए नीट की तैयारी कर रहीं हैं। गुलजार अहमद मानते हैं कि बच्चों पर अंकों का दबाव बनाने के बजाय उन पर भरोसा करना ज्यादा जरूरी है। उनके अनुसार फलक ने हमेशा पढ़ाई को अपनी प्राथमिकता में रखा और लक्ष्य तय करने के बाद उसी पर ध्यान दिया। विपरीत हालात को मात दे हौसलों से छुआ सफलता का आसमान किसी के घर में मां गंभीर बीमारी से जूझ रही थी तो किसी के घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि बुलंदियों को छू लें। उन्हें अपना पसंदीदा विषय चुनने के लिए घर से लेकर बाहर तक तमाम बातें सुननी पड़ीं लेकिन बोर्ड परीक्षा के दौरान अपने ऊपर कोई तनाव हावी नहीं होने दिया। हालात हर किसी के लिए अलग थे लेकिन लक्ष्य एक। इसी आत्मविश्वास ने कश्मीर संभाग में 12वीं कक्षा के साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स और होम साइंस के टॉपर्स को हजारों विद्यार्थियों के बीच में अलग पहचान दी। मेधावियों ने साबित किया कि सफलता संसाधनों या परिस्थितियों की मोहताज नहीं, बल्कि मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास बड़ा आधार होते हैं। सोमवार को श्रीनगर के एसकेआईसीसी में टॉपर्स ने अपनी कामयाबी की कहानी साझा की। बेटियों की कामयाबी पर क्या बोले पिता बेटी लोन जैनब-उन-निसा की इस उपलब्धि पर हिलाल लोन (गांदरबल से) खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं। जैनब ने 10वीं में 100 फीसदी अंक हासिल किए हैं और आगे चलकर आईएएस अधिकारी बनना चाहतीं हैं। लोन के मुताबिक सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। जैनब ने पूरे साल नियमित पढ़ाई की और समय का सही इस्तेमाल किया। लगातार मेहनत और अनुशासन ही बच्चों को बड़ी सफलता तक पहुंचाते हैं। श्रीनगर के तारिक अली बताते हैं कि उन्होंने हमेशा बेटी जुहा को अपनी पसंद और रुचि के मुताबिक आगे बढ़ने की आजादी दी। जुहा ने 12वीं विज्ञान में 99% अंक हासिल किए हैं और अब इंजीनियर बनना चाहती हैं। उनके अनुसार हर बच्चे की अपनी अलग काबिलियत होती है, इसलिए उसको तुलना किसी दूसरे से नहीं करनी चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे सम्मान बच्चों को यह भरोसा देते हैं कि उनकी मेहनत सही दिशा में जा रही है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jun 23, 2026, 14:49 IST
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