नाम सरकारी स्कूल के रजिस्टर में, पढ़ाई मदरसे में: नूंह के 70 स्कूलों की पड़ताल, खामियों की लंबी फेहरिस्त

दिल्ली से महज 70 किमी दूर देश के 112 पिछड़े जिलों में शुमार नूंह जिले के फिरोजपुर गांव में 13 साल की इल्मा का नाम सरकारी स्कूल की नौवीं कक्षा में दर्ज है। लेकिन वह कभी स्कूल के गेट में दाखिल नहीं हुई। सारमी (14), आतिका (11), मोहम्मद (13) और सुहैल सरकारी रिकॉर्ड में नौवीं, आठवीं और सातवीं में हैं, पर उन्होंने स्कूली किताब, कक्षा या शिक्षक को कभी देखा तक नहीं। उनकी पढ़ाई-लिखाई मदरसे में या घर से चल रही है। ताज्जुब है कि 70 फीसदी बेटियों के नाम हर साल अगली कक्षा में बढ़ रहे हैं, जबकि वे कक्षा, किताब-कॉपी व शिक्षक से कोसों दूर हैं। कागजों में डेढ़ लाख छात्र हाजिर हैं लेकिन ये स्कूलों के बजाय मदरसों में तालीम ले रहे हैं। अमर उजाला ने जिले के 70 सरकारी स्कूलों में जमीनी पड़ताल की, पेश है विस्तृत रिपोर्ट। धूल फांकती किताबें और कुर्सियां टूटे फर्श, सीलन भरी दीवारें, जर्जर छत, टाट की जगह कागज-गत्तों पर बैठी बच्चियां, पेयजल के लिए बूंद-बूंद को तरसते बच्चे और गंदे शौचालय यही है इस इलाके के स्कूलों की असल तस्वीर।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 03, 2026, 09:12 IST
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