Ajmer Urs: बदल जाएगी BJP की अब 'एम फैक्टर' को जोड़ने की रणनीति, चादर भेजने से पहले मोदी ने दी थी एक और नसीहत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से बुधवार को अजमेर की ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह पर भेजी गई चादर पेश की गई। प्रधानमंत्री मोदी की ओर से हर साल उर्स पर चादर पेश की जाती है। लेकिन इस बार भेजी गई चादर और उसका भाईचारे का संदेश इस लिहाज से भी और महत्वपूर्ण हो जाता है कि प्रधानमंत्री ने हाल में आयोजित हुई भाजपा कार्यकारिणी की बैठक में मुस्लिम समाज के लिए गलत बयानबाजी करने वालों को कड़ा संदेश दिया था। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की ओर से दिए गए इस संदेश का मुस्लिम समुदाय में बहुत ही सकारात्मक असर होगा। भाजपा के रणनीतिकारों ने भी 'एम फैक्टर' को साधने के लिए जमीन पर बड़ी रणनीतियां बनानी शुरू कर दी है। सियासी जानकारों का मानना है कि भाजपा को केंद्र की सरकारी योजनाओं से होने वाले लाभ और ट्रिपल तलाक के मामले में कानून बनाकर पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को बहुत हद तक अपने पक्ष में कर लिया था। ट्रिपल तलाक का कानून बनाने और सरकारी योजनाओं के लाभ के चलते के देश के अलग-अलग राज्यों के मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में भाजपा का वोट प्रतिशत भी बढ़ा था। क्योंकि इस साल मध्यप्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ समेत नॉर्थ-ईस्ट के इलाकों और जम्मू-कश्मीर समेत दस अलग-अलग राज्यों में चुनाव होने हैं। ऐसे में अगर भाजपा राजनैतिक तौर पर मुसलमानों के किसी भी एक बड़े तबके को अपने साथ जोड़ लेती है तो भाजपा के लिए यह बूस्टर वोट बैंक के तौर पर काम करेगा। सियासी जानकार जीडी सिंह कहते हैं कि अब सवाल यह उठता है कि आखिर मुसलमान भाजपा को क्यों वोट दें। सिंह इसका जवाब भी देते हैं। वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरीके से हाल में आयोजित हुई भाजपा की कार्यकारिणी की बैठक में मुस्लिम समुदाय के प्रति किसी भी तरीके की गलत बयानबाजी करने वालों को सख्त संदेश दिया है। उसका बड़ा असर देखने को मिल सकता है। सिंह कहते हैं कि पीएम मोदी के इस बयान के बाद भाजपा को जरूर पता करना चाहिए कि इसका किस तरह से मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में मुस्लिम समुदाय के अलग-अलग तबकों में असर हो रहा है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक बृजेश शुक्ला कहते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी का बयान बहुत हद तक यह संदेश देने में कामयाब तो रहा है कि बेवजह की बयानबाजी न की जाए। लेकिन वह यह शंका भी जताते हैं कि इसका अनुसरण कितना होगा। क्योंकि उनका कहना है कि जब तक मोदी के दिए गए इस बयान का दोनों तरफ से पालन नहीं होगा, तब तक इसका असर दिखना थोड़ा मुश्किल है। रही बात एम फैक्टर को साधने की तो बृजेश शुक्ला कहते हैं कि केंद्र की योजनाओं ने मुसलमान तबके को अपने साथ जोड़ने में बड़ी अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा पीड़ित तलाकशुदा महिलाओं और उनके परिवार वालों को ट्रिपल तलाक से भी फायदा हुआ है। वह कहते हैं कि प्रधानमंत्री की अजमेर शरीफ में भेजी गई चादर पोशी तो हर साल होती है। इसलिए उसका कोई राजनैतिक असर तो नहीं होगा, लेकिन यह बात बिल्कुल है कि एक आपसी सौहार्द की मिसाल के तौर पर यह पेश किया जा रहा है। वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की रणनीति के मुताबिक मुस्लिम फैक्टर को जितना ज्यादा से ज्यादा अपने पक्ष में किया जा सकेगा, उतना ही आने वाले चुनावों में उसको फायदा होगा। राजनीतिक विश्लेषक जीडी सिंह कहते हैं कि कभी कांग्रेस के पक्ष में सबसे ज्यादा मतदान करने वाले मुस्लिम समुदाय का जब कांग्रेस से मोहभंग हुआ, तो वह समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी, आरजेडी, जेडीयू, एनसीपी और टीएमसी समेत अलग-अलग पार्टियों में अपने रहनुमा की तलाश करने लगे। इसका फायदा भी इन सभी राजनीतिक पार्टियों को खूब हुआ। सिंह कहते हैं जो कि बीते कुछ समय में केंद्र सरकार की योजनाओं ने निष्पक्ष रुप से जिस तरीके से हर जाति वर्ग समुदाय के लोगों को लाभ दिया है वह जरूर भाजपा को मजबूत कर रही है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 25, 2023, 19:52 IST
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