FADA Report 2025: साल 2025 में रिटेल बिक्री ने पकड़ी रफ्तार, GST 2.0 बना गेम चेंजर, जानें चौंकाने वाले आंकड़े

भारतीय ऑटोमोबाइल रिटेल सेक्टर के लिए साल 2025 बेहद सफल रहा। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस दौरान कुल वाहनों की बिक्री 7.71 प्रतिशत बढ़कर 2.81 करोड़ यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 2.61 करोड़ था। साल की शुरुआत धीमी रहने के बावजूद, दूसरी छमाही में बाजार ने जबरदस्त वापसी की। विशेषज्ञों का मानना है कि जीएसटी 2.0 के तहत दरों में हुए सुधार और बढ़ती अफोर्डेबिलिटी ने ग्राहकों के सेंटिमेंट को बदलने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। पैसेंजर व्हीकल और टू-व्हीलर सेगमेंट का दबदबा 2025 के दौरान पैसेंजर व्हीकल (PV) सेगमेंट में सबसे मजबूत प्रदर्शन देखा गया। जहां सालाना आधार पर 9.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। जोकि 2024 के 40.79 लाख यूनिट्स के मुकाबले 2025 में 44.75 लाख कारें बिकी है। वहीं, दोपहिया वाहनों के बाजार ने भी 7.24% की वृद्धि के साथ 2.02 करोड़ का आंकड़ा पार कर लिया। ये भी पढ़े: CES 2026: उबर और ल्यूसिड ने पेश की भविष्य की सवारी, बिना ड्राइवर के सड़कों पर दौड़ेगी यह 'हाई-टेक' रोबोटैक्सी ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ी मांग मिडिल क्लास लोगों की बजट में अनुकूल मॉडल की उपलब्धता की वजह से ग्रामीण क्षेत्रों में भी इसकी मांग बढ़ी और टू-व्हीलर सेगमेंट को काफी मजबूती हुई। इसके अलावा थ्री-व्हीलर और कमर्शियल व्हीकल सेगमेंट की बात करें तो इसमें क्रमश: 7.21 प्रतिशत और 6.71 प्रतिशत की स्थिर ग्रोथ देखी गई। किसको ज्यादा फायदा हुआ FADA अध्यक्ष सीएस विग्नेश्वर के अनुसार, साल 2025 की पहली छमाही (जनवरी से अगस्त) काफी चुनौतीपूर्ण रही। इसके बाद सितंबर में लागू हुए जीएसटी रेट रैशनलाइजेशन ने बाजार की दिशा बदल दी। टैक्स दरों में कटौती का सबसे अधिक फायदा छोटी कारों, 350सीसी तक के टू-व्हीलर्स और मास-मार्केट कमर्शियल वाहनों को मिला। इस नीतिगत बदलाव ने न केवल वाहनों की कीमतें कम कीं, बल्कि उन ग्राहकों को भी शोरूम तक खींचा जो लंबे समय से खरीदारी टाल रहे थे। ये भी पढ़े: Telangana EV Policy: तेलंगाना को ईवी हब बनाने की तैयारी, गाड़ी खरीदने पर मिलेगी छूट, जानें मास्टरप्लान क्या इसके बाद साल 2025 में भारत के मोबिलिटी मिक्स में बड़ा बदलाव देखने को मिला। इलेक्ट्रिक वाहनों का चलन टू-व्हीलर, पैसेंजर व्हीकल और कमर्शियल व्हीकल तीनों श्रेणियों में बढ़ा है। खासकर थ्री-व्हीलर सेगमेंट में अब इलेक्ट्रिक का पूरी तरह दबदबा स्थापित हो चुका है। दूसरी ओर सीएनजी वाहनों ने भी मिडिल क्लास परिवारों और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अपनी पैठ मजबूत की है। इस सफलता के बाद ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री अब 2026 में भारी उम्मीदों के साथ प्रवेश कर रही है। करीब 75 प्रतिशत डीलरों का मानना है कि आने वाले समय में भी ये रफ्तार कायम रहेगी। इसके पीछे ग्रामीण भारत का मजबूत योगदान भी वजह है। यहां रबी की अच्छी बुवाई और अनुकूल मौसम ने किसानों की क्रय शक्ति बढ़ाई है। साथ ही, आरबीआई की स्थिर रेपो रेट (5.25%) और आगामी बजट में संभावित कर-राहत की उम्मीदें उपभोक्ताओं के आत्मविश्वास को बढ़ा रही हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 06, 2026, 16:26 IST
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