आज का शब्द: विसर्जन और किशन सरोज की रचना- कर दिए लो आज गंगा में प्रवाहित

'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- विसर्जन, जिसका अर्थ है- परित्याग करना, छोड़ना, विदा करना। प्रस्तुत है किशन सरोज की रचना- कर दिए लो आज गंगा में प्रवाहित कर दिए लो आज गंगा में प्रवाहित सब तुम्हारे पत्र, सारे चित्र, तुम निश्चिन्त रहना धुन्ध डूबी घाटियों के इन्द्रधनु तुम छू गए नत भाल पर्वत हो गया मन बून्द भर जल बन गया पूरा समन्दर पा तुम्हारा दुख तथागत हो गया मन अश्रु जन्मा गीत कमलों से सुवासित यह नदी होगी नहीं अपवित्र, तुम निश्चिन्त रहना दूर हूँ तुमसे न अब बातें उठें मैं स्वयं रंगीन दर्पण तोड़ आया वह नगर, वे राजपथ, वे चौंक-गलियाँ हाथ अंतिम बार सबको जोड़ आया थे हमारे प्यार से जो-जो सुपरिचित छोड़ आया वे पुराने मित्र, तुम निश्चिंत रहना लो विसर्जन आज वासंती छुअन का साथ बीने सीप-शंखों का विसर्जन गुँथ न पाए कनुप्रिया के कुंतलों में उन अभागे मोर पंखों का विसर्जन उस कथा का जो न हो पाई प्रकाशित मर चुका है एक-एक चरित्र, तुम निश्चिंत रहना हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

#Kavya #AajKaShabd #Kavita #आजकाशब्द #Hindihanihum #हिंदीहैंहम #HindiHainHum #हिंदीहैंहम #HindiApnoKiBhashaSapnoKiBhasha #हिंदीअपनोंकीभाषासपनोंकीभाषा #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 07, 2026, 17:28 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




आज का शब्द: विसर्जन और किशन सरोज की रचना- कर दिए लो आज गंगा में प्रवाहित #Kavya #AajKaShabd #Kavita #आजकाशब्द #Hindihanihum #हिंदीहैंहम #HindiHainHum #हिंदीहैंहम #HindiApnoKiBhashaSapnoKiBhasha #हिंदीअपनोंकीभाषासपनोंकीभाषा #VaranasiLiveNews