आज का शब्द: त्रास और प्रेमलता त्रिपाठी की कविता- अनागत अंत का स्वागत

'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- त्रास, जिसका अर्थ है- भय, डर, कष्ट, तकलीफ। प्रस्तुत है प्रेमलता त्रिपाठी की कविता- अनागत अंत का स्वागत अनागत अंत का स्वागत, नहीं भय त्रास होता है। विकट अंतिक अमावस के, सुखद अहसास होता है। सजे सत्कर्म से जीवन, करो निज धर्म साधक मन, नियति हो पुण्य कर्मों का, वही संन्यास होता है। यही संकल्प हो अपना, न कोई भूख से सोये, सतत हम दीन रक्षक हों, नहीं उपवास होता है। अमर कोई नहीं जग में, गमन है आगमन निश्चित, नशा जीवंत जीने का हृदय वह खास होता है। बहाओ प्रेम की गंगा, यही हो आज का नारा, सफल आराधना होगी, सदा विश्वास होता है। हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 22, 2025, 19:19 IST
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