आज का शब्द: रूपक और कुँवर नारायण की कविता 'आदमी अध्यवसायी था'

हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है - रूपक जिसका अर्थ है1. किसी की मूर्ति 2. प्रकार 3. लक्षण 4. नाटक 5. एक प्रकार का अलंकार। कवि कुँवर नारायण ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। आदमी अध्यवसायी था' अगर इतने ही की जयंती मनाकर सी दी गई उसकी दृष्टि उसके ही स्वप्न की जड़ों से। न उगने पाई उसकी कोशिशें। बे लोच पत्थरों के मुक़ाबले कटकर रह गए उसके हाथ तो कौन संस्कार देगा उन सारे औज़ारों को जो पत्थरों से ज़्यादा उसको तराशते रहे। चोटें जिनकी पाशविक खरोंच और घावों को अपने ऊपर झेलता और वापस करता विनम्र कर ताकि एक रूखी कठोरता की भीतरी सुंदरता किसी तरह बाहर आए। उसको छूती आँखों का अधैर्य कि वह पारस क्यों नहीं जो छूते ही चीज़ों को सोना कर दे क्यों खोजना पड़ता है मिथकों में, वक्रोक्तियों में, श्लेषों में, रूपकों में झूठ के उल्टी तरफ़ क्यों इतना रास्ता चलना पड़ता है एक साधारण सचाई तक भी पहुँच पाने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Feb 28, 2026, 11:20 IST
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