आज का शब्द: नमित और अज्ञेय की कविता 'जैसे तुझे स्वीकार हो'
हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है नमित जिसका अर्थ है -झुका हुआ। कवि अज्ञेय ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। जैसे तुझे स्वीकार हो। डोलती डाली, प्रकंपित पात, पाटल-स्तंभ विलुलित, खिल गया है सुमन मृदु-दल, बिखरते किंजल्क प्रमुदित, स्नात मधु से अंग, रंजित-राग केशर-अंजली से स्तब्ध-सौरभ है निवेदित : मलय मारुत, और अब जैसे तुझे स्वीकार हो। पंख कंपन-शिथिल, ग्रीवा उठी, डगमग पैर, तन्मय दीठ अपलक, कौन ऋतु है, राशि क्या, है कौन-सा नक्षत्र, गत-शंका, द्विधा-हत बिंदु अथवा वज्र हो— चंचु खोले, आत्म-विस्मृत हो गया है यती चातक : स्वाति, नीरद, नील-द्युति, जैसे तुझे स्वीकार हो। अभ्र लख भ्रू-चाप-सा, नीचे प्रतीक्षा में स्तिमित नि:शब्द धरा पाँवर-सी बिछी है, वक्ष उद्वेलित हुआ है स्तब्ध, चरण की हो चाप किंवा छाप तेरे तरल चुंबन की : महाबल, हे इंद्र, अब जैसे तुझे स्वीकार हो। मैं खड़ा खोले हृदय के सभी ममता-द्वार, नमित मेरा भाल : आत्मा नमित-तर है नमित-तम मम भावना-संसार, फूट निकला है न-जाने कौन हृत्तल वेधता-सा निवेदन का अतुल पारावार, अभर-वर हो, वरद-कर हो, तिरस्कारी वर्जना, हो प्यार : तुझे प्राणाधार, जैसे हो तुझे स्वीकार— सखे, चिन्मय देवता, जैसे तुझे स्वीकार हो! हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jun 25, 2026, 10:14 IST
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