आज का शब्द: मुक्तामणि और सुभद्राकुमारी चौहान की कविता 'ठुकरा दो या प्यार करो'
हिंदी हैं हम शब्द-शृंखला में आज का शब्द है -मुक्तामणि जिसका अर्थ है -सीपी से निकलने वाला एक बहुमूल्य रत्न; मोती। कवयित्री सुभद्राकुमारी चौहान ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। देव! तुम्हारे कई उपासक कई ढंग से आते हैं। सेवा में बहुमूल्य भेंट वे कई रंग की लाते हैं॥ धूमधाम से साजबाज से वे मंदिर में आते हैं। मुक्तामणि बहुमूल्य वस्तुऐं लाकर तुम्हें चढ़ाते हैं॥ मैं ही हूँ ग़रीबिनी ऐसी जो कुछ साथ नहीं लाई। फिर भी साहस कर मंदिर में पूजा करने को आई॥ धूप-दीप-नैवेद्य नहीं है झाँकी का शृंगार नहीं। हाय! गले में पहनाने को फूलों का भी हार नहीं॥ कैसे करूँ कीर्तन, मेरे स्वर में है माधुर्य नहीं। मन का भाव प्रकट करने को वाणी में चातुर्य नहीं॥ नहीं दान है, नहीं दक्षिणा ख़ाली हाथ चली आई। पूजा की विधि नहीं जानती, फिर भी नाथ! चली आई॥ पूजा और पुजापा प्रभुवर! इसी पुजारिन को समझो। दान-दक्षिणा और निछावर इसी भिखारिन को समझो॥ मैं उन्मत्त प्रेम की प्यासी हृदय दिखाने आई हूँ। जो कुछ है, वह यही पास है, इसे चढ़ाने आई हूँ॥ चरणों पर अर्पित है, इसको चाहो तो स्वीकार करो। यह तो वस्तु तुम्हारी ही है ठुकरा दो या प्यार करो॥ हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Mar 01, 2026, 12:50 IST
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