आज का शब्द: करुण और बालकवि बैरागी की कविता- झर गये पात
'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- करुणा। प्रस्तुत है बालकवि बैरागी की कविता- झर गये पात झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी नव कोंपल के आते-आते टूट गये सब के सब नाते राम करे इस नव पल्लव को पड़े नहीं यह पीड़ा सहनी झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी कहीं रंग है, कहीं राग है कहीं चंग है, कहीं फ़ाग है और धूसरित पात नाथ को टुक-टुक देखे शाख विरहनी झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी पवन पाश में पड़े पात ये जनम-मरण में रहे साथ ये "वृन्दावन" की श्लथ बाहों में समा गई ऋतु की "मृगनयनी" झर गये पात बिसर गई टहनी करुण कथा जग से क्या कहनी हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 10, 2026, 17:56 IST
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