आज का शब्द: धरणी और हरिवंशराय बच्चन की कविता- मयूरी,नाच, मगन-मन नाच !

'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- धरणी, जिसका अर्थ है- पृथ्वी, धरती, मन की धारणा-शक्ति या वृत्ति। प्रस्तुत है हरिवंशराय बच्चन की कविता- मयूरी,नाच, मगन-मन नाच! मयूरी, नाच, मगन-मन नाच! गगन में सावन घन छाए, न क्यों सुधि साजन की आए; मयूरी, आँगन-आँगन नाच! मयूरी, नाच, मगन-मन नाच! धरणी पर छाई हरियाली, सजी कलि-कुसुमों से डाली; मयूरी, मधुवन-मधुवन नाच! मयूरी, नाच, मगन-मन नाच! समीरण सौरभ सरसाता, घुमड़ घन मधुकण बरसाता; मयूरी, नाच मदिर-मन नाच! मयूरी, नाच, मगन-मन नाच! निछावर इंद्रधनुष तुझ पर, निछावर, प्रकृति-पुरुष तुझ पर, मयूरी, उन्मन-उन्मन नाच! मयूरी, छूम-छनाछन नाच! मयूरी, नाच, मगन-मन नाच! हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 14, 2026, 17:30 IST
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