आज का शब्द: आतुर और केदारनाथ अग्रवाल की कविता- पहला पानी

'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- आतुर, जिसका अर्थ है- व्याकुल, व्यग्र, उतावला, उत्सुक, बेचैन। प्रस्तुत है केदारनाथ अग्रवाल की कविता- पहला पानी पहला पानी गिरा गगन से उमड़ा आतुर प्यार, हवा हुई, ठण्डे दिमाग के जैसे खुले विचार । भीगी भूमि-भवानी, भीगी समय-सिंह की देह, भीगा अनभीगे अंगों की अमराई का नेह पात-पात की पाती भीगी-पेड़-पेड़ की डाल, भीगी-भीगी बल खाती है गैल-छैल की चाल । प्राण-प्राणमय हुआ परेवा,भीतर बैठा, जीव, भोग रहा है द्रवीभूत प्राकृत आनन्द अतीव । रूप-सिन्धु की लहरें उठती, खुल-खुल जाते अंग, परस-परस घुल-मिल जाते हैं उनके-मेरे रंग । नाच-नाच उठती है दामिने चिहुँक-चिहुँक चहुँ ओर वर्षा-मंगल की ऐसी है भीगी रसमय भोर । मैं भीगा, मेरे भीतर का भीगा गंथिल ज्ञान, भावों की भाषा गाती है जग जीवन का गान । हमारे यूट्यूब चैनल कोSubscribeकरें।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Dec 10, 2025, 15:51 IST
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