Delhi NCR News: शब्दोत्सव में संस्कृति, कला और विचारों का अनोखा संगम, युवाओं में दिखा उत्साह

-हिंदू इतिहास, वंदे मातरम्, बंगाल और दक्षिणपथ पर चर्चा, कवि सम्मेलन में रही भीड़-गिद्दा-भांगड़ा से लेकर कथक और शिवाजी को समर्पित ढोल की थाम पर थिरके लोग अमर उजाला ब्यूरोनई दिल्ली। मेजर ध्यानचंद स्टेडियम में चल रहे शब्दोत्सव के दूसरे दिन संस्कृति, कला, भोजन और विचारों का अनोखा मेल देखने को मिला। सुबह से ही स्टेडियम में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई थी और जैसे-जैसे दिन चढ़ा, भीड़ बढ़ती गई। खासकर युवाओं की मौजूदगी सबसे ज्यादा नजर आई, जो परिचर्चाओं को सुनने और सवाल-जवाब में हिस्सा लेने को उत्सुक दिखे। मंच पर गिद्दा और भांगड़ा, कथक और महाराष्ट्र के कलाकारों ने वीर शिवाजी को समर्पित ढोल-नगाड़ों के साथ नृत्य ने दर्शकों को बांधे रखा। वहीं दूसरी ओर स्टेडियम के खुले हिस्से में स्कूली बच्चों से लेकर बड़े और पेशेवर कलाकार पेंटिंग करते नजर आए। कला दीर्घा जैसी यह जगह दिनभर लोगों का ध्यान खींचती रही। खाने-पीने के स्टॉलों पर भी भारी भीड़ रही और लगभग हर समय यहां रौनक बनी रही।विचार-मंथन का दायरा व्यापकहिंदू इतिहास, मिथक का सत्य, सिनेमा में हिंदू, वंदे मातरम्, बंगाल और दक्षिणपथ जैसे विषयों पर पत्रकारों, साहित्यकारों, समाजसेवियों, एक्टिविस्टों और राजनेताओं ने खुलकर चर्चा की। इन सत्रों में बड़ी संख्या में युवा श्रोता मौजूद रहे, जो विषयों को गंभीरता से सुनते और नोट्स लेते दिखाई दिए। वंदे मातरम् और बंगाल विषय पर हुई चर्चा में देश के कई वरिष्ठ पत्रकारों ने हिस्सा लिया। चर्चा के दौरान पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की स्थिति, बढ़ती आबादी, राज्य सरकार के कामकाज के तरीके और चुनाव प्रक्रिया जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने कहा कि इन विषयों पर खुलकर बात होनी चाहिए और कुछ मामलों में केंद्र सरकार की भूमिका भी जरूरी है।उत्तरपथ-दक्षिणपथ के विवाद में नहीं फंसेंगे युवाभाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी और हैदराबाद से भाजपा नेता माधवी लता ने दक्षिणपथ विषय पर अपने विचार रखे। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देश का दक्षिण हिस्सा सनातन और हिंदू धर्म से गहराई से जुड़ा रहा है। जिस दिन दक्षिण भारत के लोग खुलकर हिंदुत्व की बात करने लगेंगे, उस दिन दुनिया को इसकी ताकत का अहसास होगा। उन्होंने दक्षिण भारत के हिंदुओं को पढ़ा-लिखा और खुशहाल बताते हुए आदि शंकराचार्य का उदाहरण दिया, जिनका जन्म केरल में हुआ और जिनकी समाधि केदारनाथ में स्थित है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मैकाले और मार्क्सवाद से प्रभावित इतिहासकारों ने उत्तर भारत को लेकर गलत व्याख्याएं पेश कीं। कवि सम्मेलन में भारी भीड़शाम को आयोजित कवि सम्मेलन में सांसद मनोज तिवारी भी मौजूद रहे। भारी भीड़ ने माहौल को और जीवंत बना दिया। कुल मिलाकर शब्दोत्सव का दूसरा दिन विचार, संस्कृति और जनभागीदारी के लिहाज से खास रहा, जहां मनोरंजन के साथ-साथ गंभीर मुद्दों पर खुली चर्चा देखने को मिली।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Jan 03, 2026, 22:01 IST
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