खुल गई निवेश की एक नई खिड़की: सीमित रिटर्न से परेशान निवेशक! कॉरपोरेट बॉन्ड बन सकता है नया सुरक्षित विकल्प
आईटी प्रोफेशनल अमन ने अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा शेयर बाजार में लगा रखा है। जब बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा, तो अमन का पोर्टफोलियो डगमगाने लगा। वह चाहता था कि कुछ पैसा ऐसी जगह रखा जाए, जहां बैंक एफडी से ज्यादा रिटर्न मिले, लेकिन शेयरों जैसा जोखिम बिल्कुल न हो। अमन ने कॉरपोरेट बॉन्ड के बारे में सुना था, जहां बड़ी कंपनियां कर्ज लेती हैं और अच्छा ब्याज देती हैं। लेकिन यहां एंट्री की फीस थी कम से कम 10 लाख रुपये। अमन के लिए यह दरवाजा बंद था। सेबी के बड़े सुधारों से बदली तस्वीर 2023 तक इस बाजार में 99.5% हिस्सा केवल बड़े संस्थानों का था। आम निवेशक के लिए एंट्री में बाधा थी। सेबी ने जुलाई 2024 में प्राइवेट प्लेसमेंट वाले बॉन्ड्स की न्यूनतम निवेश सीमा को घटाकर महज 10,000 रुपये कर दिया। इसके बाद क्रमश: सुधारों से कुछ मामलों में तो यह 1,000 रुपये तक आ गया। तो आज अमन जैसे आम निवेशक वहां पैसे लगा रहे हैं, जहां पहले सिर्फ बड़े बैंक, वित्तीय संस्थान और अमीर लोग ही पैसा लगा पाते थे। क्या होते हैं कॉरपोरेट बॉन्ड कॉरपोरेट बॉन्ड एक ऋण साधन है, जिसे कोई कंपनी पैसा जुटाने के लिए जारी करती है। कंपनी (बॉन्ड जारीकर्ता) उन निवेशकों (बॉन्डधारकों) के माध्यम से अपनी जरूरत का पैसा प्राप्त करती है, जो बॉन्ड में निवेश करते हैं और बदले में वह कूपन भुगतान नामक ब्याज की निश्चित या परिवर्तनीय दर पर वार्षिक या समय-समय पर भुगतान करती है। इसे उदाहरण से समझते हैं अगर आप 5 फीसदी निश्चित ब्याज देने वाले 10-वर्षीय बॉन्ड में 10,000 रुपये निवेश करते हैं, तो कंपनी कूपन भुगतान के रूप में प्रति वर्ष 500 रुपये देगी और बॉन्ड मैच्योर होने पर, यानी 10 वर्षों में मूल राशि 10,000 रुपये वापस कर देगी। घटती ब्याज दरों के दौर में बढ़ती है बॉन्ड्स की चमक ब्याज दरों में वर्तमान गिरावट, सरकारी संस्थाओं और कंपनियों के लिए कर्ज जुटाने के लिए बॉन्ड जारी करने के आकर्षण को बढ़ा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कंपनियों ने मई 2025 में पांच साल तक के बॉन्ड के माध्यम से 61,200 करोड़ रुपये जुटाए, जो मई 2024 की समान अवधि में जुटाई गई राशि का लगभग तीन गुना है। क्यों बदल रहा है रिटेल निवेशकों का मूड रिटर्न का अंतर: बैंक एफडी जहां आज भी 7.5% (सीनियर सिटीजन) पर अटकी हैं, वहीं अच्छी रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड्स 7-9.25% तक का रिटर्न दे रहे हैं। स्थिरता का भरोसा: शेयरों की तुलना में बॉन्ड्स कम अस्थिर होते हैं और बाजार की अनिश्चितता के समय पोर्टफोलियो को सहारा देते हैं। नियमित आय: रिटायर लोगों के लिए आय का सुरक्षित जरिया है। टैक्स-दक्षता: यदि लंबी अवधि के लिए रखा जाए, तो कुछ बॉन्ड्स को कैपिटल गेन टैक्स का लाभ मिलता है। कॉरपोरेट बॉन्ड Vs बैंक एफडी (रिटर्न की तुलना) कॉरपोरेट बॉन्ड 1 साल 3 साल बैंक 1 साल 3 साल Baroda BNP Paribas 8.44% 7.94% Jana S.F. 7.00% 7.50% ICICI Prudential 8.03% 7.88% HDFC 6.25% 6.45% Nippon India 7.85% 7.85% ICICI 6.25% 6.60% Aditya Birla Sun Life 7.37% 7.77% IOB 6.50% 6.10% HDFC Corp. Bond 7.37% 7.73% BoB 6.25% 6.50% स्रोत: पैसाबाजार डॉट कॉम, आंकड़े 31 दिसंबर, 2025 के मुताबिक। एफडी से बेहतर हैं कॉरपोरेट बॉन्ड अगर आप फिक्स्ड रिटर्न चाहते हैं और एफडी की घटती दरों से परेशान हैं, तो अच्छे रेटिंग वाले कॉरपोरेट बॉन्ड्स की ओर रुख करें। ये बैंक एफडी के मुकाबले अक्सर बेहतर रिटर्न देते हैं। निवेशक अपने पोर्टफोलियो को इक्विटी, गोल्ड और बॉन्ड्स के बीच बांटकर जोखिम कम कर सकते हैं। लेकिन याद रहे, ज्यादा रिटर्न के लालच में रेटिंग से समझौता न करें। - डॉ. वीके विजयकुमार चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड बॉन्ड्स में निवेश के लाभ आय का स्थिर स्रोत: नियमित ब्याज भुगतान (कूपन भुगतान) के माध्यम से एक लगभग तय अाय प्रदान करते हैं। पोर्टफोलियो विविधीकरण: इक्विटी के साथ बॉन्ड्स को शामिल करके, निवेशक विभिन्न एसेट क्लासेस में अपना जोखिम फैला सकते हैं। आकर्षक यील्ड: वर्तमान माहौल में जहां ब्याज दरें कम या स्थिर हैं, कॉरपोरेट बॉन्ड्स बचत खातों या एफडी की तुलना में आकर्षक रिटर्न देते हैं। वित्तीय लक्ष्य : कॉरपोरेट बॉन्ड्स की विशिष्ट परिपक्वता तिथियां होती हैं, जिससे निवेशक जरूरतों के अनुसार अपना निवेश मैनेज कर सकता है। कॉरपोरेट बॉन्ड्स आमतौर पर सरकारी बॉन्ड्स की तुलना में बेहतर रिटर्न देते हैं। यह जानना जरूरी है कि आप पैसा कहां लगा रहे हैं: सिक्योर्ड बॉन्ड्स : ये कंपनी की संपत्तियों द्वारा सुरक्षित होते हैं। अगर कंपनी को कुछ होता है, तो संपत्तियां बेचकर आपका पैसा चुकाया जाता है। अनसिक्योर्ड बॉन्ड्स : संपत्ति गिरवी नहीं। पूरी तरह कंपनी की साख पर भरोसा करते हैं। जोखिम ज्यादा है, तो रिटर्न भी ज्यादा हो सकता है। जीरो-कूपन बॉन्ड्स: सालाना ब्याज नहीं, बल्कि बॉन्ड छूट पर मिलता है और परिपक्वता पर पूरी राशि मिलती है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 05, 2026, 07:39 IST
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