Chandigarh News: 2026 पंजाब की राजनीति का निर्णायक साल, 2027 से पहले सियासी इम्तिहान
-आप सत्ता बचाने की जद्दोजहद में, कांग्रेस वापसी की तलाश में-अकाली दल के सामने अस्तित्व की लड़ाई, भाजपा कर रही वोट को सीट में बदलने की तैयारी---सुरिंदर पाल जालंधर। साल 2026 पंजाब की राजनीति के लिए महज एक कैलेंडर वर्ष नहीं, बल्कि 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सेमीफाइनल माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के चार साल पूरे होने को हैं और इसी दौरान कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल व भाजपा चारों प्रमुख दलों के सामने साख, संगठन और नेतृत्व की बड़ी परीक्षा खड़ी है। हालिया चुनावी नतीजे और जमीनी संकेत साफ कर रहे हैं कि पंजाब की राजनीति अब चार ध्रुवीय संघर्ष की ओर बढ़ रही है।2022 में विधानसभा चुनाव जीतकर सत्ता में आई आप जहां विधानसभा में सबसे बड़ी ताकत बनी, वहीं 2024 लोकसभा चुनाव में उसका वोट शेयर कांग्रेस के लगभग बराबर आ गया। भाजपा का वोट प्रतिशत तेजी से बढ़ा, लेकिन यह सीटों में तब्दील नहीं हो सका। उधर, अकाली दल का परंपरागत वोट बैंक लगातार सिमटता नजर आया।आप के लिए सबसे कठिन सालचार साल सत्ता में रहने के बाद 2026 आप के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। सरकार ने साल की शुरुआत में हर परिवार को 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज और महिलाओं को प्रति माह 1100 रुपये देने का वादा किया है। इन योजनाओं से करीब एक करोड़ से अधिक महिलाएं जुड़नी हैं, जो पिछले चार साल से इसका इंतजार कर रही थीं। इन योजनाओं को जमीन पर उतारना आप के लिए सियासी और वित्तीय दोनों स्तर पर बड़ी चुनौती होगी। बेरोजगारी, नशा, कानून-व्यवस्था और राज्य की आर्थिक स्थिति जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार हमलावर है। पंचायत और स्थानीय निकाय चुनावों में आप का प्रदर्शन मजबूत रहा, लेकिन आलोचक इसे सरकारी तंत्र का असर बताते हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 2022 का 42 फीसदी विधानसभा वोट 2027 में दोहराया जा सकेगा, जबकि 2024 में पार्टी का ग्राफ घटकर करीब 26 फीसदी रह गया।कांग्रेस: वापसी या बिखरावकांग्रेस ने 2024 लोकसभा चुनाव में पंजाब में सबसे ज्यादा वोट प्रतिशत हासिल कर यह संकेत जरूर दिया कि पार्टी अभी राजनीतिक दौड़ से बाहर नहीं हुई है। सात लोकसभा सीटें जीतकर कांग्रेस ने वापसी का दावा मजबूत किया, लेकिन अंदरूनी कलह, संगठनात्मक ढांचे की कमजोरी और स्थायी नेतृत्व का अभाव अब भी पार्टी की बड़ी कमजोरी बना हुआ है। कांग्रेस का वोट बैंक आप और भाजपा दोनों की ओर बंटता दिख रहा है। सवाल यह है कि क्या कांग्रेस खुद को फिर से मुख्य विकल्प के रूप में पेश कर पाएगी या सिर्फ वोट काटने वाली पार्टी बनकर रह जाएगी।चुनावी आंकड़े क्या कहते हैं2022 विधानसभा चुनाव आप: 42.01% (पूर्ण बहुमत)कांग्रेस: 22.98% अकाली दल: 18.38% भाजपा: 6.60% ---2024 लोकसभा चुनाव (पंजाब)कांग्रेस: 26.3%आप: 26.0%भाजपा: 18.5%अकाली दल: 13.4%अकाली दल:अस्तित्व की लड़ाईकभी पंजाब की राजनीति की रीढ़ रहा शिरोमणि अकाली दल आज सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है। किसान आंदोलन के बाद बदली सियासी हवा, पंथक मुद्दों पर असमंजस और अंदरूनी गुटबाजी ने पार्टी को कमजोर कर दिया है। पुनरुत्थान की कोशिशों के बीच पंथक वोट में सेंध और लगातार घटता वोट प्रतिशत चिंता बढ़ा रहा है। 2026 अकाली दल के लिए या तो पुनर्गठन का साल होगा या फिर गिरावट और गहरी होगी। पार्टी की निगाहें एक बार फिर भाजपा के साथ संभावित गठबंधन पर टिकी हैं।भाजपा: वोट बढ़े, सीटें दूरभाजपा ने 2024 में अकेले चुनाव लड़कर 18 फीसदी से ज्यादा वोट हासिल कर चौंकाया, खासकर शहरी हिंदू वोट पर उसकी पकड़ मजबूत हुई। लेकिन बड़ी चुनौती यही है कि वोट सीटों में नहीं बदल पा रहे। भाजपा के पास पंजाब में दो विधायक हैं, जबकि कोई लोकसभा सांसद नहीं। रवनीत बिट्टू को राज्यसभा भेजकर केंद्र में मंत्री बनाना पार्टी की रणनीति का हिस्सा है, लेकिन अकाली दल से गठबंधन को लेकर पार्टी के भीतर मतभेद साफ दिख रहे हैं। 2026 भाजपा के लिए स्पष्ट नीति, मजबूत स्थानीय नेतृत्व और सामाजिक समीकरण साधने की अग्निपरीक्षा होगा।
#6WillBeADecisiveYearForPunjabPolitics #APoliticalTestBefore2027. #VaranasiLiveNews
- Source: www.amarujala.com
- Published: Jan 01, 2026, 19:31 IST
Chandigarh News: 2026 पंजाब की राजनीति का निर्णायक साल, 2027 से पहले सियासी इम्तिहान #6WillBeADecisiveYearForPunjabPolitics #APoliticalTestBefore2027. #VaranasiLiveNews
