वैश्विक व्यवस्था के लिए चुनौतियों का साल: ईरान में अमेरिकी बमबारी, लेबनान पर इस्राइल का हमला; टैरिफ की ताप...
वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) द्वारा अपनी बढ़ती प्रासंगिकता और महत्व के जोरदार दावों और वैश्विक नेताओं द्वारा बहुपक्षीय, लचीले, जरूरत-आधारित या रणनीतिक और तदर्थ लेन-देन वाले गठजोड़ों को अपनाने के बावजूद, 2025 में दुनिया डोनाल्ड ट्रंप से ऐसे प्रभावित हुई, जैसा पहले कभी नहीं हुआ था, भले आप उनसे प्यार करें या नफरत। बढ़ती अर्थव्यवस्था, सबसे कम बेरोजगारी, सबसे कम महंगाई, टैरिफ से खरबों डॉलर की कमाई, हजारों विदेशियों को देश से निकालना और कई देशों से प्रवेश पर रोक और अमेरिका में सुनहरा दौर लाने के उनके दावों पर आप चाहे विश्वास करें या नहीं, पर उनके टैरिफ का असर भारत समेत उनके दोस्तों और दुश्मनों, दोनों ने महसूस किया। कई नेता अमेरिकी उत्पादों पर कम शुल्क और नए क्षेत्रों में बाजार पहुंच देने का प्रस्ताव लेकर व्हाइट हाउस पहुंचे। पाकिस्तान और इस्राइल द्वारा नामित किए जाने के बावजूद और भारत-पाकिस्तान के बीच झड़पों सहित आठ युद्धों को रोकने के अपने दावों के बावजूद, वह नोबेल शांति पुरस्कार से बेशक चूक गए, लेकिन इस्राइल-हमास संघर्ष या रूस-यूक्रेन संघर्ष और मिसाइलों और ड्रोन के साथ इस्राइल-ईरान के बीच पूरी तरह से युद्ध को सुलझाने की सभी कोशिशों में उनकी गैर-मौजूदगी में भी मौजूदगी महसूस की गई। इस तरह ट्रंप 2025 के सबसे सही मैन ऑफ द ईयर थे! ट्रंप का तूफान 2026 में भी अमेरिका और विदेश में होने वाले घटनाक्रमों पर असर डालता रहेगा! दूसरी पारी में ट्रंप के साथ रिश्ते को बेहतर करने के लिहाज से भारत के लिए 2025 एक चुनौतीपूर्ण साल रहा है। भारत के साथ 25 साल से चले आ रहे करीबी द्विपक्षीय रिश्तों को ट्रंप ने ताक पर रख दिया। भारत में होने वाले क्वाड शिखर सम्मेलन में उन्होंने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है, लेकिन व्हाइट हाउस में दिवाली और जन्मदिन पर प्रधानमंत्री मोदी को फोन करने जैसे दिखावे किए। भारत ने समझदारी दिखाते हुए कोई जवाबी टैरिफ लगाने की घोषणा नहीं की है और न ही अमेरिका के दबाव के आगे झुका है। उसने पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम करवाने में ट्रंप की भूमिका को भी नकार दिया है, भले ही ट्रंप ने 20 से ज्यादा बार ऐसा दावा किया हो! व्यापार वार्ता में, भारत अपनी आपत्तियों पर कायम रहा और उसने चतुराई से अपनी रणनीतिक स्वायत्तता का संकेत दिया; चीन के तियानजिन में एससीओ शिखर सम्मेलन में पुतिन, शी जिनपिंग और मोदी की तिकड़ी का एकसाथ आना, मोदी और पुतिन का एक ही कार में बैठना और पुतिन का हाल ही में दिल्ली दौरा, जिसमें फिर से दोनों एकसाथ कार में बैठे और मोदी का शांति के पक्ष में खड़े होने का दावा करना, लेकिन यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा न करना, इन सबने वाशिंगटन और उसके पश्चिमी सहयोगियों को एक स्पष्ट संदेश दिया होगा। अमेरिकी टैरिफ की वजह से भारत में नौकरियों का नुकसान हुआ है और रत्न-आभूषण, झींगा, कपड़ा, चमड़े के सामान, हस्तशिल्प और ऑटोमोबाइल पार्ट्स के निर्यात पर 30 अरब अमेरिकी डॉलर का असर पड़ा है। इनसे निपटने के लिए भारत ने अपने प्रयास तेज कर दिए हैं और कई देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। यूरोपीय संघ, संयुक्त अरब अमीरात और दूसरे देशों के साथ भी मुक्त व्यापार समझौते हो सकते हैं। वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर पहले से जानकारी देकर पेट्रोलिंग के साथ थोड़ी शांति, कैलाश मानसरोवर यात्राओं की फिर से शुरुआत, सीधी विमान, सीमित सीमा व्यापार और चीन से दुर्लभ खनिजों और बैटरी की आपूर्ति और चीनी निवेश की संभावनाएं चीन के साथ रिश्तों में कुछ नरमी दिखाती हैं, हालांकि अंदरूनी अविश्वास बना हुआ है, खासकर एलएसी, पाकिस्तान को चीनी समर्थन और जी-2 के विचार को लेकर चिंताओं के बारे में। मोदी ने पेरिस में एआई शिखर सम्मेलन, ब्राजील में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन, दक्षिण अफ्रीका में जी-20 शिखर सम्मेलन और चीन में एससीओ शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। एआई, अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों, ग्लोबल साउथ के महत्व और अफ्रीका के लिए 10 लाख प्रशिक्षकों के बारे में उनके विचारों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई। यात्रा और बातचीत के जरिये ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, आसियान और दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशियाई गणराज्य, लैटिन अमेरिका, खासकर ब्राजील, अर्जेंटीना और मेक्सिको और पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र: मिस्र, सऊदी अरब, ईरान, इस्राइल, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और ओमान के साथ संबंधों को मजबूत और व्यापक बनाया गया। हालांकि ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवादियों के बुनियादी ढांचे और पाकिस्तानी वायु सेना को काफी नुकसान पहुंचाया, लेकिन पाकिस्तानी सैन्य प्रमुख ने अपने मुल्क के लोगों से कहा कि उन्होंने भारत के खिलाफ जंग जीत ली है। उन्होंने अमेरिका, चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के साथ रिश्ते मजबूत किए और भारत विरोधी बयानबाजी जारी रखी। शेख हसीना के भारत में होने, उनके प्रत्यर्पण की मांगों और हिंदुओं व अल्पसंख्यकों, भारतीय मिशनों और चौकियों पर बढ़ते हमलों के कारण बांग्लादेश के साथ रिश्ते सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए हैं। नेपाल में प्रधानमंत्रियों की बदली और भारत के खिलाफ क्षेत्रीय दावों के कारण संबंध बहुत अच्छे नहीं हैं। भूटान के साथ मजबूत संबंध और मालदीव, श्रीलंका व अफगानिस्तान के साथ संबंधों में सकारात्मक बदलाव भारतीय कूटनीति के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। वर्ष 2025 में 'ताकत ही सही है' का खुला प्रदर्शन देखने को मिला। अमेरिका ने ईरान पर बमबारी की, रूस ने यूक्रेन के खिलाफ हमला जारी रखा, इस्राइल ने लेबनान पर हमला किया, सीरिया, गाजा और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में अब भी सुरक्षा नहीं मिली! पोप ने कड़ाके की ठंड और बारिश में गाजा में फलस्तीनियों की नरक जैसी जिंदगी की याद दिलाई। सीमा सिरोही ने हाल ही में अपने एक लेख में कहा है कि नया साल नए अपमान, नया गुस्सा और नफरत करने के नए तरीके लेकर आएगा। काश, कि वह गलत साबित हों!
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Dec 29, 2025, 11:05 IST
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