पवन खेड़ा केस: असम सरकार की याचिका पर कल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हाईकोर्ट के जमानत आदेश को दी गई है चुनौती

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी पर टिप्पणी करने के मामले में तेलंगाना हाई कोर्ट से मिली राहत को अब असम सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट कल, 15 अप्रैल को इस मामले पर सुनवाई करने के लिए तैयार है। क्या है पूरा मामला विवाद की शुरुआत पांच अप्रैल को हुई थी। पवन खेड़ा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा पर गंभीर आरोप लगाए थे। खेड़ा ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री की पत्नी के पास कई देशों के पासपोर्ट हैं और विदेशों में ऐसी संपत्तियां हैं, जिनका जिक्र मुख्यमंत्री ने अपने चुनावी हलफनामे में नहीं किया है। असम के मुख्यमंत्री और उनके परिवार ने इन आरोपों को पूरी तरह से गलत और मनगढ़ंत बताया है। इसके तुरंत बाद, गुवाहाटी क्राइम ब्रांच में पवन खेड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया। इसमें चुनाव के संबंध में झूठा बयान देने और धोखाधड़ी जैसी धाराएं शामिल हैं। हाईकोर्ट से मिली थी राहत गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए पवन खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। 10 अप्रैल को हाईकोर्ट ने उन्हें 'ट्रांजिट एंटिसिपेटरी बेल' यानी अग्रिम जमानत दे दी थी। कोर्ट ने माना था कि खेड़ा की गिरफ्तारी की आशंका वाजिब है, इसलिए उन्हें एक हफ्ते का समय दिया गया ताकि वह असम की संबंधित अदालत में जाकर अपनी बात रख सकें। हाईकोर्ट ने जमानत देते समय कुछ शर्तें भी रखी थीं। खेड़ा को एक लाख रुपये के निजी मुचलके पर रिहा किया जाएगा। उन्हें जांच में पूरा सहयोग करना होगा। वह बिना इजाजत देश छोड़कर नहीं जा सकेंगे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि उन्हें सार्वजनिक रूप से इस मामले पर ऐसी बयानबाजी से बचने को कहा गया था, जिससे जांच प्रभावित हो। यह भी पढ़ें:मुख्यमंत्री के खिलाफ मां ने मोर्चा खोला:NCW से की CM हिमंत की शिकायत; कहा- चुनावी रैली में लगाए अनर्गल आरोप असम सरकार की आपत्ति असम सरकार ने अब इसी राहत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की है। सरकार का तर्क है कि तेलंगाना हाई कोर्ट से खेड़ा को मिली यह राहत प्रक्रियात्मक रूप से सही नहीं है। अधिवक्ता शुभोदीप रॉय के माध्यम से दायर इस याचिका पर जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस एएस चंदरकर की बेंच कल सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली यह सुनवाई राजनीतिक और कानूनी दोनों लिहाज से काफी अहम है। अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है, तो पवन खेड़ा को असम की निचली अदालत में पेश होने का समय मिल जाएगा। लेकिन अगर अदालत असम सरकार की दलीलों से सहमत होती है, तो खेड़ा की कानूनी मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 14, 2026, 16:58 IST
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