ब्रिक्स संसदीय मंच का आगाज: ओम बिरला ने संवाद, कूटनीति और सहयोग पर दिया जोर; क्षेत्रीय संघर्ष पर क्या कहा?

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को कहा कि क्षेत्रीय संघर्ष, युद्ध, आर्थिक अस्थिरता, व्यापारिक तनाव, आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियां किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं रहतीं। उन्होंने कहा, ''इनका असर सभी देशों पर पड़ता है। ऐसे में संवाद, कूटनीति और सहयोग का महत्व और बढ़ जाता है।'' बिरला ने यहां 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का उद्घाटन करते हुए यह बात कही। उन्होंने संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में आयोजित कार्यक्रम में सदस्य और साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधियों को संबोधित किया। दो दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी नई दिल्ली कर रही है। हिंदी में दिए अपने संबोधन में लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी समझ और विश्वास बढ़ाने, तनाव कम करने तथा वैश्विक चुनौतियों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशने में संसदें विशेष भूमिका निभा सकती हैं।उन्होंने पुराने संसद भवन यानी संविधान सदन में प्रतिनिधिमंडलों का स्वागत किया। इस वर्ष ब्रिक्स संसदीय मंच की स्थापना के 20 वर्ष भी पूरे हो रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों से निपटने में संसदों की भूमिका अहम ओम बिरला ने कहा, ''ब्रिक्स देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है और इनके पास विश्व के लगभग एक-तिहाई भूभाग का हिस्सा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार में भी इन देशों की महत्वपूर्ण भागीदारी है।भौगोलिक स्थिति, संस्कृति, भाषा और सामाजिक परिस्थितियों में अंतर होने के बावजूद ब्रिक्स देश लोकतांत्रिक मूल्यों और मानवता के प्रति साझा प्रतिबद्धता से जुड़े हुए हैं।'' बिरला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यहां आयोजित ब्रिक्स देशों के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में सर्वसम्मति से स्वीकार किए गए संयुक्त वक्तव्य की सराहना की।उन्होंने कहा, ''इन बैठकों में लिए गए संकल्पों को अब ठोस नतीजों में बदलने की जरूरत है। इसमें कानून बनाने, बजट तैयार करने, चर्चा करने और सरकारी कामकाज की निगरानी करने के जरिए संसदें योगदान दे सकती हैं।'' प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया पर बिरला के एक लेख का भी जिक्र किया। इसमें ब्रिक्स संसदीय मंच के माध्यम से सदस्य और साझेदार देशों के बीच संवाद और सहयोग मजबूत करने की भूमिका पर चर्चा की गई है। हरिवंश बोले- वैश्विक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण मंच है ब्रिक्स राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने भी संविधान सदन के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में प्रतिनिधियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है, इसलिए यह वैश्विक और क्षेत्रीय सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच है।हरिवंश ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में समूह ने 'जन-केंद्रित और मानवता को प्राथमिकता' देने वाला दृष्टिकोण अपनाया है। इसकी थीम मजबूती, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा, ''पीएम मोदी ने ग्लोबल साउथ की आवाज को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ब्रिक्स के विस्तार की पैरवी की। इसके परिणामस्वरूप नई दिल्ली घोषणापत्र सामने आया, जिसमें वैश्विक शासन व्यवस्था में सुधार और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की वकालत की गई है।'' हरिवंश ने सदस्य देशों से अपनी क्षमताओं को साझा करते हुए समावेशिता को बढ़ावा देने और वैश्विक प्रगति के लिए साझेदारी मजबूत करने का आह्वान किया।भारत ने जून 2025 में ब्रासीलिया में आयोजित 11वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान इसकी अध्यक्षता संभाली थी। उस समय ओम बिरला को 12वें मंच का अध्यक्ष नामित किया गया था।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 26, 2026, 09:35 IST
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