Meerut News: तिलक पुस्तकालय को घोषित किया जाए राष्ट्रीय धरोहर
शहर के सबसे पुराने पुस्तकालय में कई दशक बाद हुआ आयोजनपठन-पाठन की लुप्त होती संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए किया जागरूकमाई सिटी रिपोर्टरमेरठ। घंटाघर स्थित ऐतिहासिक तिलक पुस्तकालय एवं वाचनालय में विश्व पुस्तक दिवस के अवसर पर एक भव्य संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कई वर्षों के लंबे अंतराल के बाद पुस्तकालय परिसर में किसी सार्वजनिक कार्यक्रम की हलचल दिखाई दी। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज में पठन-पाठन की लुप्त होती संस्कृति को पुनर्जीवित करना और जन-मानस को पुस्तकों के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। इस दौरान इस ऐतिहासिक पुस्तकालय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग भी की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रोफेसर देवेश चंद्र शर्मा ने पुस्तकालय के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पुस्तकें अज्ञानता के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का मार्ग प्रशस्त करती हैं। उन्होंने इसके इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया यह पुस्तकालय वर्ष 1886 से ज्ञान और बौद्धिक विकास का केंद्र बना हुआ है। वर्तमान में यहां लगभग 60,000 पुस्तकों का विशाल और समृद्ध संग्रह उपलब्ध है। हालांकि इतने बड़े संग्रह की देखभाल के लिए वर्तमान में मात्र दो कर्मचारी ही तैनात हैं।धनसिंह कोतवाल शोध संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष तस्वीर सिंह चपराना ने लोगों को पुस्तकों के प्रति आकर्षित करने पर जोर दिया। संगोष्ठी के दौरान पुस्तकालय की जर्जर हालत पर गहरी चिंता व्यक्त की गई और प्रस्ताव पारित किया गया कि इस ऐतिहासिक केंद्र को राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर इसका संचालन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को सौंपा जाए। पुस्तकालय को सीधे केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन लाने का प्रस्ताव भी रखा गया। प्रोफेसर शर्मा ने शासन-प्रशासन से व्यवस्था सुधारने हेतु एक विशेष समिति के गठन की मांग की और इस संबंध में औपचारिक पत्रावली प्रस्तुत करने की घोषणा की। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप योग्य कर्मचारियों की नियुक्ति और उचित मानदेय सुनिश्चित करने की मांग दी गई। 35 दुर्लभ पुस्तकें और जर्नल्स भेंट किएइस अवसर पर प्रोफेसर देवेश चंद्र शर्मा ने अपनी ओर से 35 दुर्लभ पुस्तकें और जर्नल्स पुस्तकालय को भेंट स्वरूप प्रदान किए। कार्यक्रम के समापन पर वर्षों से यहां अपनी सेवाएं दे रहे कर्मचारी प्रमोद कुमार और अभय सिंह को सम्मानित कर उनके धैर्य और निष्ठा की सराहना की गई। संगोष्ठी में शहर के प्रबुद्ध वर्ग, शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से अजय सोम, हेमचंद कुशवाहा, सुधाकर आशावादी, डॉ. गौरव दत्त, सतीश कुमार गुप्ता, अभय सिसोदिया, प्रमोद उपाध्याय, हरेंद्र गौतम, छोटे लाल, गौतम प्रजापति और तरुण उपस्थित रहे।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 23, 2026, 16:03 IST
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