सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: राजस्थान सरकार शिक्षा व्यवस्था में राजस्थानी भाषा लागू करने की नीति बनाए
राजस्थानी भाषा के संरक्षण और संवर्धन से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को बड़ा निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने आज पदम मेहता एवं अन्य बनाम राजस्थान राज्य एवं अन्य मामले में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार को शिक्षा व्यवस्था में राजस्थानी भाषा को शामिल करने के लिए ठोस नीति तैयार करने का निर्देश दिया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने की। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि राजस्थानी भाषा का ऐतिहासिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत समृद्ध है। अदालत ने यह भी माना कि राजस्थानी भाषा को कई विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में पहले से मान्यता प्राप्त है। इसके साथ ही कोर्ट ने राजस्थान सरकार को निर्देश दिया कि वह प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा सहित पूरे शैक्षणिक ढांचे में राजस्थानी भाषा को शामिल करने के लिए उपयुक्त नीति तैयार करे। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशों के अनुपालन की रिपोर्ट 30 सितंबर 2026 तक पेश करने को कहा है। मातृभाषा में शिक्षा का दिया गया हवाला यह मामला पदम मेहता और एक अन्य याचिकाकर्ता द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) से जुड़ा था। याचिका में राजस्थानी भाषा को शिक्षा व्यवस्था और राजस्थान शिक्षक पात्रता परीक्षा (REET) में शामिल करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने संविधान के अनुच्छेद 350-A, बच्चों को निःशुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 29(2)(f) और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का हवाला देते हुए कहा कि बच्चों को यथासंभव उनकी मातृभाषा में शिक्षा मिलनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने तर्क दिया कि करोड़ों लोग राजस्थानी भाषा बोलते हैं और इसकी समृद्ध साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत है, बावजूद इसके इसे REET परीक्षा या शिक्षण माध्यम में शामिल नहीं किया गया, जबकि अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को मान्यता दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि राजस्थान विधानसभा ने 25 अगस्त 2003 को ही एक प्रस्ताव पारित कर राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने की सिफारिश की थी। पदम मेहता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष सिंघवी ने पक्ष रखा। राज्य सरकार ने कहा- यह नीति से जुड़ा विषय राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता (AAG) शिव मंगल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यह विषय राज्य सरकार के नीतिगत निर्णय से जुड़ा है और सरकार उचित समय पर सिद्धांततः इस पर निर्णय लेगी। राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने कभी यह नहीं कहा कि शिक्षा प्रणाली में राजस्थानी भाषा को शामिल करना गलत या अस्वीकार्य है। सरकार ने अपने जवाब में बताया कि वर्तमान में राजस्थानी भाषा प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के स्वीकृत पाठ्यक्रम का हिस्सा नहीं है, इसलिए इसे REET में शामिल नहीं किया गया। हालांकि, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत मातृभाषा आधारित शिक्षा और बहुभाषीय शिक्षण से संबंधित प्रावधानों को लागू करने के लिए विभिन्न टास्क फोर्स पहले ही गठित की जा चुकी हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की प्रक्रिया जारी है और क्षेत्रीय भाषाओं तथा मातृभाषा में शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर विचार किया जा रहा है।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: May 12, 2026, 11:24 IST
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