हाईकोर्ट : कृषि भूमि के आसपास व्यवसायिक गतिविधियां होने पर बढ़ सकता है स्टांप शुल्क, तुलसी इंफ्राजोन की याचिकाए

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि कृषि भूमि का बाजार मूल्य निर्धारित करते वक्त उस पर व्यावसायिक गतिविधियों की संभावनाओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए। यदि कृषि भूमि के आसपास व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना है, तो वहां स्टांप शुल्क भी बढ़ सकता है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की अदालत ने आगरा में खरीदी गई जमीन पर स्टांप शुल्क की कमी निर्धारित किए जाने के मामले में मेसर्स तुलसी इन्फ्राजोन प्राइवेट लिमिटेड की दोनों याचिकाएं खारिज कर दी हैं।कंपनी ने आगरा के मौजा पथौली स्थित गाटा संख्या 110 की 2,815 वर्ग मीटर जमीन चार जून 2018 को खरीदी थी। कंपनी ने जमीन को कृषि भूमि मानते हुए स्टांप शुल्क जमा किया था। सब रजिस्ट्रार सदर, आगरा ने दो अगस्त 2018 को जमीन का निरीक्षण किया। रिपोर्ट में बताया गया कि आसपास आवासीय गतिविधियां चल रही हैं। पास के गाटा संख्या 108 और 109 में प्लॉटिंग हो रही है और 200 मीटर के दायरे में खेती नहीं की जा रही है। इसके बाद, भारतीय स्टांप अधिनियम के तहत कार्रवाई शुरू की गई।26 जुलाई 2022 को दोबारा हुए निरीक्षण में भी पाया गया कि पिछले चार-पांच वर्षों से जमीन पर खेती नहीं हो रही है और आसपास निजी बिल्डर प्लॉटिंग कर आवासीय कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं। जिलाधिकारी ने 29 अगस्त 2025 को धारा 47-ए के तहत 9,500 रुपये प्रति वर्ग मीटर सर्किल रेट से जमीन का मूल्य 2.67 करोड़ रुपये से अधिक निर्धारित किया। इस आधार पर 18,72,010 रुपये स्टांप शुल्क बनता था जबकि कंपनी ने 3,95,500 रुपये ही जमा किए थे। इस तरह 14,77,510 रुपये स्टांप शुल्क की कमी निकाली गई। इसके अलावा, 3,69,380 रुपये अर्थदंड और 1.5 प्रतिशत मासिक ब्याज भी लगाया गया। कंपनी की अपीलें पहले ही खारिज हो चुकी थीं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 03, 2026, 09:09 IST
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