पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हमला: रिमोट बम धमाके में पुलिसकर्मी बलिदान, बेटे की भी मौत; टीटीपी का हाथ?
उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान का खैबर पख्तूनख्वा प्रांत एक बार फिर से आतंकवाद की आग में सुलग उठा है। रविवार को पेशवा से सामने आई शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां के अशांत इलाकों में हुए दो अलग-अलग खौफनाक हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। पहली घटना शांगला जिले के चकेसर तहसील की है, जहां पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। अधिकारियों के मुताबिक, मरटुंग पुलिस स्टेशन में तैनात कांस्टेबल कयूम खान अपनी ड्यूटी पर थाने की तरफ जा रहे थे, तभी रास्ते में पहले से पार्क की गई एक मोटरसाइकिल में जबरदस्त धमाका हो गया। इस रिमोट-कंट्रोल बम ब्लास्ट में कांस्टेबल कयूम खान की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। छुट्टी पर घर आए पुलिसकर्मी और मासूम बेटे को क्यों बनाया गया निशाना आतंकियों की कायराना करतूत सिर्फ यहीं नहीं रुकी, बल्कि इसके बाद टैंक जिले से एक और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई। पुलिस सूत्रों ने बताया कि दक्षिण वजीरिस्तान की सीमा से लगे इस जिले में एक पुलिस अधिकारी अपनी छुट्टी बिताने के लिए अपने पुश्तैनी घर आए हुए थे। जैसे ही वे अपने घर पहुंचे, घात लगाकर बैठे अज्ञात और बेखौफ مسلح हमलावरों ने उन पर अचानक ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। इस भीषण गोलीबारी में पुलिसकर्मी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके साथ मौजूद उनका छोटा सा मासूम बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया। आनन-फानन में घायल बच्चे को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन रविवार सुबह इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया, जिससे परिवार और पुलिस महकमे में कोहराम मच गया। आखिर इन इलाकों में क्यों लगातार बढ़ रहा है आतंकी खतरा खैबर पख्तूनख्वा प्रांत लंबे समय से लगातार जारी उग्रवाद, आतंकवादी हिंसा और अफगानिस्तान से आतंकियों की सीमा पार आवाजाही के कारण देश के सबसे संवेदनशील और अशांत क्षेत्रों में गिना जाता है। पाकिस्तान सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का साफ तौर पर मानना है कि प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) इन तमाम ताबड़तोड़ हमलों के पीछे मुख्य रूप से जिम्मेदार है। नवंबर 2022 में संघीय सरकार के साथ हुए टीटीपी के संघर्षविराम समझौते के आधिकारिक तौर पर टूटने के बाद से इस सीमावर्ती इलाके में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों पर हमलों में भारी तेजी आई है। शांगला जिले में हुए रिमोट-कंट्रोल धमाके की भयानक गूंज सुनाई देते ही स्थानीय पुलिस दल तुरंत हरकत में आया और बिना वक्त गंवाए घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे इलाके को चारों तरफ से सील कर दिया। सुरक्षा बलों ने आतंकियों की धरपकड़ और उनकी सटीक लोकेशन का पता लगाने के लिए फिलहाल पूरे क्षेत्र में एक बड़ा और सघन तलाशी अभियान छेड़ रखा है। हालांकि इन दोनों ही सनसनीखेज और खौफनाक वारदातों की जिम्मेदारी अभी तक किसी भी आतंकवादी गुट या व्यक्तिगत संगठन ने आधिकारिक तौर पर नहीं ली है, लेकिन शक की सुई टीटीपी पर टिकी है। जमीनी हकीकत क्या है उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में हुए इन दोहरे हमलों ने वहां की कानून-व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। एक तरफ जहां शांगला में रिमोट बम धमाके से सिपाही की जान गई, वहीं टैंक जिले में पिता के साथ उनके मासूम बेटे को भी मौत के घाट उतार दिया गया। टीटीपी के साथ संघर्षविराम टूटने के बाद से सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते आतंकी खतरे ने सुरक्षा एजेंसियों की मुश्किलें और ज्यादा बढ़ा दी हैं।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 08, 2026, 10:46 IST
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