पेड़ों के अंधाधुंध कटान से बढ़ रहा बड़ी त्रासदी का खतरा : नाथू राम
धर्मशाला। विकास के नाम पर हो रहे पेड़ों के अंधाधुंध कटान और पर्यावरण से छेड़छाड़ ने देवभूमि पर संकट के बादल गहरा दिए हैं। जस्टिस फॉर देव आत्मा हिमालय के संस्थापक एवं समाजसेवी नाथू राम चौहान ने आगाह किया कि प्रकृति के साथ हो रहे खिलवाड़ के कारण अब कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बादल फटने की घटनाएं हो रही हैं। धर्मशाला में रविवार को प्रेसवार्ता के दौरान नाथू राम चौहान ने कहा कि यदि समय रहते प्रशासन और सरकार नहीं चेते तो जिला कांगड़ा 1905 जैसी किसी बड़ी त्रासदी का गवाह बन सकता है। उन्होंने कहा कि पहले बादल फटने की घटनाएं 5 से 6 हजार मीटर की ऊंचाई पर होती थीं, लेकिन पर्यावरण असंतुलन के कारण अब 2 से 3 हजार मीटर वाले क्षेत्रों में भी यह तबाही दिखने लगी है। उन्होंने चिंता जताई कि कांगड़ा भूकंप की दृष्टि से अब सिस्मिक जोन-6 में आ गया है, जो बेहद खतरनाक संकेत है। 1905 के विनाशकारी भूकंप को प्रशासन भूल चुका है और शायद अब किसी बड़े तांडव का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर फोरलेन निर्माण से जैसा तांडव जिला कांगड़ा में देखने को मिल रहा है, ऐसा पहले पूरे प्रदेश में देखने को नहीं मिला। टनल से निकलने वाली मिट्टी को सुरक्षित स्थानों पर डंप करने के बजाय सीधे खड्डों के पानी में बहाया जा रहा है, जिससे प्राकृतिक जल स्रोत नष्ट हो रहे हैं। उन्होंने मटौर-शिमला और मंडी-पठानकोट फोरलेन के निर्माण में जुटी कंपनियों को चुनौती दी कि वे डंपिंग के लिए इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों का ब्योरा सार्वजनिक करें। उन्होंने कहा कि मंडी में 023, 2024, 2025 में जो बड़ी त्रासदी आई, क्या हम कांगड़ा में भी वैसा ही मंजर देखना चाहते हैं। उन्होंने एसडीएम और तहसीलदारों से अपील की कि संवेदनशील क्षेत्रों में जनता की सुरक्षा को विकास से ऊपर रखा जाए।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Apr 05, 2026, 17:17 IST
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