एमएलआर के इंतजार में बैठे रहे डाॅक्टर: घायल ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया, पांच घंटे लेकर घूमता रहा बेबस बेटा
पंचकूला-शिमला नेशनल हाईवे पर एचएमटी गेट के पास शनिवार को हुए सड़क हादसे में घायल 43 वर्षीय कारोबारी की मौत ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घायल तड़पता रहा और डॉक्टर एमएलआर यानी मेडिको लीगल केस की कागजी कार्रवाई का इंतजार करते रहे। करीब 5 घंटे तक एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने के चक्कर में उसकी जान चली गई। मृतक की पहचान सुरेश कुमार निवासी गांव चक्कूलदाना, जिला कैथल के रूप में हुई है। वह परिवार सहित पिंजौर में किराये के मकान में रहता था। बेटे मंदीप सिंह ने पुलिस को बताया कि शनिवार सुबह 10:15 बजे उसके पिता एचएमटी पिंजौर गेट के पास सड़क किनारे ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी कर उसका डाला ठीक कर रहे थे। इसी दौरान अमरावती की तरफ से आई तेज रफ्तार पिकअप ने पीछे से उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर से सुरेश उछलकर सड़क किनारे गिरे और उनकी सिर-छाती पर गंभीर चोट आई, टांग टूट गई। हादसे में पिकअप सवार को भी चोटें आईं। दोनों वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। हादसे की सूचना पर 112 की टीम मौके पर पहुंची। सेक्टर-6 से सुबह 10.26 बजे एंबुलेंस रवाना हुई, लेकिन तब तक परिजन घायल को पिंजौर पॉली क्लीनिक ले जा चुके थे। वहां से सुबह 11.05 बजे प्राथमिक उपचार देकर उसे सेक्टर-6 सिविल अस्पताल रेफर किया गया। इलाज शुरू नहीं किया, कालका भेजा सुबह 11.30 बजे घायल सेक्टर-6 पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि इमरजेंसी के डॉक्टर ने माइनर ओटी में ले जाने के बाद एमएलआर का हवाला देकर इलाज रोक दिया। कहा- यह पुलिस केस है, पहले एमएलआर कटवाओ, ऐसे एडमिट नहीं करेंगे। इसे बाहर रखो और कालका चले जाओ। 22 साल का बेटा मंदीप हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन इलाज शुरू नहीं हुआ। डेढ़ से दो घंटे तक पिता इमरजेंसी के बाहर तड़पते रहे। मजबूरन बेटा प्राइवेट एंबुलेंस से करीब 20 किलोमीटर दूर कालका सब-डिविजनल अस्पताल ले गया। मंदीप ने बताया- पूरे रास्ते पापा बातचीत कर रहे थे। बोले- बेटा, चक्कर आ रहे हैं, पानी पिला दे, सांस नहीं आ रही। दोपहर 2 बजे वह कालका के लिए निकला और दोपहर 3 बजे कालका पहुंचा, लेकिन तब तक हालत बिगड़ चुकी थी। कालका अस्पताल में सुरेश ने बेटे की आंखों के सामने दम तोड़ दिया। क्या कहते हैं नियम नियमों के अनुसार रोड एक्सीडेंट या क्रिटिकल केस में सबसे पहले मरीज को गोल्डन आवर में इमरजेंसी इलाज देकर स्टेबल किया जाना चाहिए। कागजी कार्रवाई बाद में या इलाज के समानांतर पूरी की जा सकती है। सेक्टर-6 में एमएलआर काटने की व्यवस्था है, बावजूद इसके मरीज को कालका भेजा गया। मामले की जांच शुरू हमारे संज्ञान में मामला आया है। इस बारे में मैंने इमरजेंसी इंचार्ज और अन्य डॉक्टरों से भी पूछा है। मरीज की डिटेल ली जा रही है। एमएलआर के लिए मरीज को कालका क्यों भेजा गया, इसकी जांच शुरू करवा दी है। सोमवार को कमेटी बनाकर हर पहलू पर जांच होगी। इमरजेंसी में जिस डॉक्टर ने मरीज को देखा और जिनकी ड्यूटी थी, उनसे लिखित में जवाब मांग लिया है। फुटेज चेक करने के लिए कह दिया है। - डॉ. आरएस चौहान, पीएमओ, जनरल अस्पताल सेक्टर-6
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 02, 2026, 05:09 IST
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