RG Kar Case: कलकत्ता हाईकोर्ट में जस्टिस मंथा ने सुनवाई से खुद को किया अलग, पीड़िता परिवार की बढ़ी चिंता
कोलकाता में चर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले में सोमवार को नया मोड़ सामने आया। कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस राजशेखर मंथा की बेंच ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। अदालत ने कहा कि कोर्ट में मामलों की संख्या अधिक है और इस संवेदनशील केस को पर्याप्त समय देने वाली बेंच के सामने सुनवाई होना न्यायहित में होगा। हाईकोर्ट की ओर से यह भी संकेत मिला है कि राज्य सरकार इस मामले को लेकर न्यायिक आयोग गठित कर सकती है। वहीं, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने इस केस में अपनी स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया। पिछली सुनवाई के दौरान जस्टिस मंथा की बेंच ने कहा था कि जरूरत पड़ने पर सीबीआई दोषी और अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर सकती है। अदालत ने स्पष्ट किया था कि जांच को आगे बढ़ाने के लिए एजेंसी किसी भी व्यक्ति से पूछताछ करने के लिए स्वतंत्र है। इसी आधार पर सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट दाखिल की। मार्च 2025 में भी बदली थी बेंच इससे पहले मार्च 2025 में जस्टिस देबांग्शु बसाक की डिवीजन बेंच ने भी पीड़िता परिवार की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था। अदालत ने समय की कमी का हवाला देते हुए कहा था कि वह मामले को पर्याप्त समय नहीं दे पा रही है। पीड़ित परिवार ने जल्द सुनवाई की मांग की थी, लेकिन पूरी सुनवाई संभव नहीं हो सकी। अगस्त 2024 में मिला था महिला डॉक्टर का शव गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को आरजी करमेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर का शव बरामद हुआ था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामले के अगले ही दिन कोलकाता पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। लंबी जांच और सुनवाई के बाद 18 जनवरी 2025 को सियालदह कोर्ट ने आरोपी संजय रॉय को दोषी करार दिया। इसके बाद 20 जनवरी 2025 को जज अनिर्बाण दास ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। पीड़िता परिवार ने उठाए थे CBI जांच पर सवाल हालांकि, सियालदह कोर्ट के फैसले से पहले ही पीड़िता के माता-पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सीबीआई जांच पर कई सवाल उठाए थे। यह याचिका पहले जस्टिस तीर्थंकर घोष की बेंच में गई, लेकिन उन्होंने मामले की सुनवाई से इनकार कर दिया क्योंकि उस समय सुप्रीम कोर्ट में भी इस केस की सुनवाई चल रही थी। इसके बाद पीड़िता परिवार सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वहां तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने सवाल उठाया कि एक ही याचिका पर दो अदालतों में सुनवाई क्यों हो। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को हाईकोर्ट में सुनने की बात कही, जिसके बाद से यह केस लगातार कलकत्ता हाईकोर्ट में लंबित है। मामले पर बनी हुई है देशभर की नजर आरजी कररेप और मर्डर केस शुरू से ही राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। डॉक्टरों के संगठनों, सामाजिक संस्थाओं और विपक्षी दलों ने मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी। अब जस्टिस राजशेखर मंथा की बेंच के खुद को अलग करने के बाद यह देखना अहम होगा कि अगली सुनवाई किस बेंच के सामने होती है और जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। अन्य वीडियो:-
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- Source: www.amarujala.com
- Published: May 12, 2026, 12:30 IST
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