बिरोजे की मोमबत्ती और दालचीनी की खुशबू वाले दीये बने आकर्षण, मंडी में महिलाओं के हुनर

दीपावली पर घरों को रोशन करने के लिए बाजार में इस बार कुछ अलग विकल्प भी लोगों को लुभा रहे हैं। रंग-बिरंगी बिजली की लड़ियों और पारंपरिक मोमबत्तियों के बीच चीड़ के पेड़ से निकलने वाले बिरोजे से तैयार मोमबत्तियां और दालचीनी, लौंग व कमल की खुशबू वाले दीये खास आकर्षण बने हुए हैं। इन उत्पादों की खासियत सिर्फ इनकी खूबसूरती नहीं, बल्कि इन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली प्राकृतिक सामग्री और स्थानीय महिलाओं की मेहनत भी है। छोटी काशी मंडी के सेरी मंच पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने घरेलू उत्पादों का ऐसा बाजार सजाया है, जहां स्थानीय हुनर और रचनात्मकता का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। यहां पहुंचने वाले लोग पारंपरिक दीयों के नए रूप और प्राकृतिक खुशबू वाली मोमबत्तियों को देखकर रुकने और इनके बारे में जानकारी लेने को मजबूर हो रहे हैं। नैणा आर्ट एंड क्राफ्ट स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने इस दीपावली पर उत्पादों की नई श्रृंखला तैयार की है। इसमें चीड़ के पेड़ से प्राप्त बिरोजे, सोया वैक्स और मधुमक्खियों के छत्ते के बाहरी आवरण का इस्तेमाल कर बनाई गई मोमबत्तियां शामिल हैं। इसके अलावा लौंग, दालचीनी और कमल की खुशबू वाले दीये भी ग्राहकों को आकर्षित कर रहे हैं। भीमसेनी कपूर से तैयार अरोमा कैंडल भी बाजार में उपलब्ध है। इन उत्पादों की खासियत यह है कि पारंपरिक सजावटी सामान से अलग इन्हें प्राकृतिक सामग्री और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों की मदद से तैयार किया जा रहा है। समूह की प्रधान संतोष सचदेवा के अनुसार, इस काम से करीब 30 महिलाएं जुड़ी हुई हैं। ये महिलाएं अपने घरों में ही अलग-अलग तरह के उत्पाद तैयार करती हैं। मोमबत्तियों और खुशबूदार दीयों के अलावा समूह की ओर से कच्ची मिट्टी, गोबर और टेराकोटा से भी आकर्षक दीये बनाए जा रहे हैं। इन उत्पादों के माध्यम से महिलाएं पारंपरिक सामग्री को नए डिजाइन और उपयोग के साथ बाजार तक पहुंचा रही हैं। इससे उन्हें घर बैठे काम करने और अपनी आमदनी बढ़ाने का अवसर मिल रहा है। संतोष सचदेवा ने बताया कि भारत सरकार के हस्तशिल्प मंत्रालय की योजनाओं के तहत महिलाओं को इस तरह के उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जाता है। प्रशिक्षण के बाद महिलाएं अपने कौशल का इस्तेमाल कर अलग-अलग वस्तुएं बना रही हैं और उन्हें बाजार में बेच रही हैं। उन्होंने बताया कि इच्छुक लोगों को भी इस तरह का प्रशिक्षण निशुल्क दिया जा सकता है। इससे अधिक महिलाएं इस काम से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। प्राकृतिक उत्पादों की खरीदारी में दिख रही लोगों की रुचि सेरी मंच पर खरीदारी के लिए पहुंच रहे लोग इन उत्पादों को लेकर उत्सुक नजर आ रहे हैं। ग्राहक न केवल इनके डिजाइन और खुशबू के बारे में जानकारी ले रहे हैं, बल्कि इन्हें खरीद भी रहे हैं। खरीदार कंचन ठाकुर का कहना है कि प्राकृतिक वस्तुओं से इतने आकर्षक उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं, यह देखकर उन्हें काफी आश्चर्य हुआ। उनके अनुसार, ऐसे उत्पाद सजावट के साथ पर्यावरण के लिहाज से भी बेहतर विकल्प बन सकते हैं। स्थानीय हुनर को मिल रहा बाजार, मजबूत हो रहा वोकल फॉर लोकल महिलाओं की यह पहल स्थानीय स्तर पर तैयार वस्तुओं को पहचान दिलाने के साथ स्वरोजगार को भी बढ़ावा दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल अभियान की भावना के अनुरूप स्थानीय उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का यह प्रयास छोटे उद्यमों के लिए भी महत्वपूर्ण है। दीपावली के इस मौसम में सेरी मंच पर सजे उत्पादों ने यह दिखाया है कि स्थानीय संसाधनों, प्रशिक्षण और रचनात्मक सोच के सहारे महिलाएं अपने लिए रोजगार के नए अवसर तैयार कर सकती हैं। इन उत्पादों की बढ़ती मांग से महिलाओं के आत्मनिर्भर बनने की उम्मीदों को भी नई ऊर्जा मिल रही है।

बिरोजे की मोमबत्ती और दालचीनी की खुशबू वाले दीये बने आकर्षण, मंडी में महिलाओं के हुनर #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 30, 2026, 08:00 IST
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