हिसार में बेटी का नाम पीपीपी से कटवाने के लिए 5 साल से लगा रहा चक्कर, पेंशन के धक्के खा रहे दिव्यांग

तीन दिन सर्वर के चलते बंद रहने के बाद सोमवार को ई दिशा केंद्र खुला। जिसके बाद ई दिशा केंद्र के हर एक काउंटर पर भीड़ नजर आई। कोई अपनी दिव्यांग पेंशन के लिए डेढ़ साल से चक्कर लगा रहा है तो कोई अपनी बेटी का नाम पीपीपी से कटवाने के लिए पांच साल से धक्के खा रहा है। वाहन चालक लाइसेंस, वाहन पंजीकरण, अनापत्ति प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज के लिए भीड़ रही। लोगों को अपनी बारी के लिए तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा। परिवार पहचान पत्र में सुधार के लिए बनाए गए काउंटर पर खड़े लोगों ने अपनी समस्याओं को लेकर नाराजगी जाहिर की। प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार को 450 से अधिक लोगों ने ई दिशा केंद्र पहुंच कर टोकन लिए। सुबह 9 बजे से ही लोग टोकन लेकर अपने काम के लिए लाइन में लगना शुरु हो गए थे। सर्वर मेंटीनेंस के चलते ई दिशा केंद्र में 3,4,5 अप्रैल को काम पूरी तरह से बंद था। जिसके बाद सोमवार को सर्वर दोबारा से चालू होने के बाद लोग ई दिशा केंद्र पहुंचे थे। पांच साल पहले मेरी बेटी की शादी हुई थी। जिसके बाद हमने उसकी शादी का सर्टिफिकेट भी बनवाया। मेरी बेटी को अपने पति के परिवार में अपना नाम जुड़वाने के लिए यहां से नाम कटवाना है। मैं समाधान शिविर में पांच बार आ चुका हूं। हर बार मुझे यहां भेज दिया जाता है। मेरी बेटी का नाम पीपीपी से नहीं काटा जा रहा। इतने छोटे से काम के लिए कितने चक्कर लगवाते हैं। राजेंद्र सिंह ,लाडवा मेरा बीपीएल का राशन कार्ड था। बिना किसी कारण बताए राशन कार्ड बंद दिया गया। मेरे परिवार में कोई सरकारी -प्राइवेट नौकरी नहीं है। आधा एकड़ भी जमीन नहीं है। तीन महीने से लगातार चक्कर कटवा रहे हैं। समाधान शिविर में आए तो यहां भेज दिया। यहां से खाद्य आपूर्ति विभाग में भेज दिया। कोई समाधान करने को तैयार नहीं है। कोई सही से जवाब देने तक को तैयार नहीं है। -बलजीत सिंह, पनिहार चक विधुर पेंशन के लिए पिछले डेढ साल से चक्कर लगा रहा हूं। कभी काेई दस्तावेज मांगते हैं कभी कोई । पहले समाज कल्याण विभाग में भेज दिया। उन्होंने सीएससी सेंटर पर भेज दिया। वहां पर भी दो बार आवेदन कर चुका। किसी तरह का जवाब नहीं आता। दो तीन महीने बाद आकर पूछता हूं तो कहते हैं कि अभी मंजूरी नहीं आई। अधिकारियों की ओर से हर एक काम को लटकाया जा रहा है। बालकिशन, गांव चौधरीवास मैं 65 प्रतिशत दिव्यांग की श्रेणी में हूं। हाथ से दिव्यांग होने के चलते काम नहीं कर पाता। दिव्यांग पेंशन के लिए कई बार आवेदन कर चुका हूं। बार बार चक्कर लगा कर थक गया हूं। डेढ़ साल पहले दिव्यांग का कार्ड बना था। पेंशन के लिए चक्कर लगवाए जा रहे जा रहे हैं। यहां भी दाे घंटे से लाइन में हूं। एक ही विंडो होने के कारण बहुत परेशानी हो रही है। सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही। -पिंटू, हिसार यहां लोगों की सुनवाई के लिए एक ही विंडो है। उस पर बैठाया गया व्यक्ति भी लोगों की सुनवाई करने की बजाए फोन पर व्यस्त है। पिछले दो घंटे से लाइन में लगा हूं। मेरे दिव्यांग भाई की रुकी हुई पेंशन बहाल कराने के लिए तीन महीने से चक्कर लगा रहा हूं।कभी समाज कल्याण ,कभी समाधान शिविर तो कभी एडीसी ऑफिस भेज देते हैं। कभी पेंशन की कॉपी मांगते हैं तो पीपीपी मांगते हैं। राकेश असीजा, हिसार

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 07, 2026, 08:51 IST
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