ट्राई ने बदले शिकायत निवारण के नियम: अपील की समयसीमा 30 से घटाकर 15 दिन की; दिव्यांगों के लिए अलग हेल्पलाइन

दूरसंचार कंपनियों के ग्राहक अब शिकायत दर्ज कराने और उसके समाधान के लिए 24 घंटे मदद ले सकेंगे। इसमें 16 घंटे मानव प्रतिनिधि उपलब्ध रहेंगे। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक सुलभ व जवाबदेह बनाने के लिए नए नियम जारी किए हैं। इसके तहत शिकायत केंद्रों पर हर दिन 24 घंटे सहायता उपलब्ध करानी होगी। कंपनियां मानव प्रतिनिधियों, स्वचालित प्रणालियों, एआई एजेंट या इनके संयोजन का इस्तेमाल कर सकेंगी। मोबाइल एप के जरिये भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे हालांकि, मानव प्रतिनिधि रोज कम से कम 16 घंटे उपलब्ध रहेंगे और तकनीक आधारित सेवाओं पर मानवीय निगरानी जरूरी होगी। नए नियमों के तहत ग्राहक कंपनियों के मोबाइल एप के जरिये भी शिकायत दर्ज करा सकेंगे, अपील कर सकेंगे और सेवा से जुड़ी जानकारी या अनुरोध भेज सकेंगे। अब शिकायत के निस्तारण के बाद अपील करने की समयसीमा 30 दिन से घटाकर 15 दिन कर दी गई है। अपीलीय प्राधिकरण को भी अपील मिलने के 15 दिन के भीतर अंतिम निर्णय बताना होगा। एजेंसी दिव्यांग ग्राहकों के लिए अलग हेल्पलाइन दूरसंचार कंपनियों को दिव्यांग ग्राहकों के लिए अलग हेल्पलाइन देनी होगी। इसके लिए विशेष डेस्क और सुगम डिजिटल सुविधाएं मुहैया करानी होंगी। ग्राहक अब सेवा प्रदाता के मोबाइल एप के जरिये शिकायत, अपील, सेवा अनुरोध और सेवा संबंधी सवाल दर्ज करा सकेंगे। वेबसाइट, वेब पोर्टल और शिकायत केंद्र के मौजूदा विकल्प भी जारी रहेंगे। अपील ईमेल, डाक और व्यक्तिगत रूप से भी की जा सकेगी। एआई के इस्तेमाल पर बनानी होगी जवाबदेही की व्यवस्था ट्राई ने जिम्मेदार एआई उपयोग के लिए दिशा-निर्देशों का मसौदा भी जारी किया है और इस पर 27 नवंबर तक सुझाव मांगे हैं। 30 अक्तूबर को जारी मसौदे के अनुसार, दूरसंचार सेवाओं में एआई का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में इसके उपयोग को लेकर स्पष्टता और जवाबदेही तय करना जरूरी है। यह पहल केंद्र सरकार के फरवरी 2026 में जारी इंडिया एआई गवर्नेंस गाइडलाइंस के अनुरूप की गई है। दूरसंचार क्षेत्र देश के डिजिटल ढांचे का अहम हिस्सा है। मसौदे का उद्देश्य दूरसंचार नेटवर्क और सेवाओं में एआई के इस्तेमाल को लेकर स्पष्टता और जवाबदेही बढ़ाना है। कंपनियों की जवाबदेही बढ़ेगी शिकायत और अपील के निस्तारण पर ग्राहकों से पांच अंकों के पैमाने पर ऑनलाइन प्रतिक्रिया ली जाएगी। इसके नतीजे हर तिमाही वेबसाइट पर प्रकाशित करने होंगे। शिकायतों और अपीलों की स्थिति तथा ग्राहक प्रतिक्रिया की तिमाही रिपोर्ट कंपनी के सीईओ या निदेशक मंडल के सामने रखनी होगी। कंपनियों को उपभोक्ता शिकायत निवारण निगरानी समिति बनानी होगी। ये भी पढ़ें:नौकरी के लिए गया था रूस: भारतीय युवक को सेना में भर्ती कर यूक्रेन बॉर्डर भेजा; मां की गुहार- मेरा बेटा लौटा दो जुर्माने और निगरानी का नया तंत्र, 20 लाख रुपये तक जुर्माना गलत तरीके से शिकायत खारिज करने पर प्रति मामले 1,000 रुपये और अपील के मामले में 5,000 रुपये का वित्तीय दंड लगेगा। कुल दंड प्रति सेवा क्षेत्र प्रति तिमाही 20 लाख रुपये तक सीमित होगा। तिमाही रिपोर्ट जमा नहीं करने पर शुरुआती 15 दिनों तक प्रतिदिन 5,000 रुपये और इसके बाद प्रतिदिन 20,000 रुपये का दंड लगेगा। इसकी सीमा प्रति मामले 10 लाख रुपये होगी।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 03, 2026, 03:10 IST
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