तकनीक: पानी के स्तर से पता चलेगी ग्लेशियर पिघलने की रफ्तार, केंद्रीय सर्वर पर पहुंचेगा रियल टाइम डाटा

हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियरों के पिघलने से होने वाले बदलावों का आकलन अब भूजल स्तर, तापमान और पानी के बहाव से जुड़े आंकड़ों के आधार पर भी किया जाएगा। केंद्रीय भूजल बोर्ड ने हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिले में 20 स्थानों पर मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने का काम शुरू कर दिया है। इन उपकरणों के माध्यम से जुटाया गया रियल टाइम डाटा केंद्रीय सर्वर तक पहुंचेगा, जहां वैज्ञानिक इसका विश्लेषण कर सकेंगे। ग्लेशियरों और उनसे बनने वाली झीलों की निगरानी पहले से की जा रही है। अब भूजल निगरानी को इस व्यवस्था से जोड़कर हिमालयी क्षेत्रों में जल संसाधनों में होने वाले बदलावों को बेहतर ढंग से समझने की दिशा में काम किया जा रहा है। ग्लेशियरों के पिघलने से निकलने वाला पानी नदियों के बहाव के साथ जमीन के भीतर जलस्तर को भी प्रभावित कर सकता है। ऐसे में भूजल स्तर, तापमान और पानी के दबाव में होने वाले बदलावों का अध्ययन वैज्ञानिकों को क्षेत्र के जल चक्र को समझने में मदद करेगा।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 20, 2026, 22:53 IST
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