सुप्रीम कोर्ट का आदेश ठंडे बस्ते में डाला: 15 माह तक कार्रवाई नहीं, अब अवमानना का नोटिस; कितनी सख्त सजा संभव?
क्यादेश की सबसे बड़ी अदालत काआदेश 15 महीने तक ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है ऐसा हुआ है महाराष्ट्र में। जुलाई, 2025 में शीर्ष कोर्ट ने मुंबई में अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया, लेकिन 15 महीने बीतने के बावजूद नवंबर, 2026 तक इस आदेश का अनुपालन नहीं हुआ। अब चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने इसमामले में कड़ा रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश का पालन न करने वाले अधिकारी के अलावा उनके निजी स्टारफ के वेतन पर भी रोक लगा दी है। अवमानना करने वाली महानगरपालिका परपांच लाख काजुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने सख्त टिप्पणी के साथ कई अहम सवाल भी पूछे हैं। ये जानना रोचक है कि अवमानना के मामले में कोर्ट कितनी सजा दे सकता है। अवमानना के मामले में कितनी सजा का प्रावधान न्यायालय की अवमानना अधिनियम, 1971 की धारा 12 और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 129 के तहत अगर कोई अवमानना का दोषी पाया जाता है तो व्यक्ति को छह महीने तक की जेल की सजा हो सकती है। कानून में दो हजार रुपये के जुर्माने का भी प्रावधान है। दोनों सजा एक साथ भी हो सकती है। सर्वोच्च न्यायालय में अवमानना के चर्चित मामले इसी साल कुछ ऐसे मामले सामने आ चुके हैं जहां कोर्ट ने अवमानना के मामले में सुनवाई तय की। केरल में कांग्रेस की प्रदेश समिति ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत पर अपमानजनक टिप्पणी की। इस मामले में अदालत ने दो वकीलों के पत्र को कॉमन याचिका की तरह दर्ज किया और कहा कि कोर्ट छह नवंबर को सुनवाई कर सकती है। एक अन्य मामला दिल्ली के रोहिणी कोर्ट में वकील विभाव कुमार झा की सोशल मीडिया टिप्पणी से जुड़ा है। इस मामले में महिलाओं और अनुसूचित जाति को लेकर आपत्तिजनक पोस्ट लिखे जाने पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने सख्त रुख अपनाया। अदालत ने स्वत: संज्ञान लेकर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई शुरू की। हालांकि, अगस्त, 2026 के इस मामले में वकील ने अपनी गलती पर गहरा पछतावा व्यक्त करते हुए बिना शर्त लिखित माफी मांगी। इसके बाद अवमानना का मामला बंद कर दिया गया। कुछ हफ्ते पहले जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) नाम की सोशल मीडिया मुहिम छेड़ने वाले महाराष्ट्र के अभिजीत दिपके, लद्दाख के शिक्षाविद सोनम वांगचुक और अन्य ने धरना-प्रदर्शन किया था। इसके बाद हुए विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पाबंदियां लगाई गईं। सुप्रीम कोर्ट ने इससे जुड़े एक मामले में केंद्रीय गृह सचिव समेत तीन वरिष्ठ अधिकारियों को अवमानना का नोटिस जारी किया था। कोर्ट से नोटिस मिलने के बाद अधिकारियों ने अदालत में सफाई देते हुए माफी मांगी, हालांकि कोर्ट ने इसके स्वरूप पर गंभीर टिप्पणी की थी। देशभर में चुनाव आयोग की तरफ से कराए जा रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर आए दिन टिप्पणियां हो रही हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र से निर्वाचित शिवसेना यूबीटी के राज्यसभा सांसद संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले के बयानों को आपत्तिजनक मानते हुए अवमानना के नोटिस जारी किए हैं। 2020 का बहुचर्तितमामला, एक रुपये का जुर्माना कुछ वर्ष पहले अधिवक्ता प्रशांत भूषण का अवमानना मामला भी सुर्खियों में रहा था। स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति बीआर गवई और जस्टिस कृष्ण मुरारी की बेंच ने भूषण को क्रिमिनल कंटेम्प्ट का दोषी ठहराया था। कोर्ट ने भूषण को माफी मांगने का मौका दिया था, लेकिन प्रशांत भूषण ने बिना शर्त माफी मांगने से इनकार करते हुए कहा था कि उनकी अंतरात्मा इसकी गवाही नहीं देती। बाद में उन्होंने प्रतीकात्मक रूप से लगाए गए एक रुपये के जुर्माने को जमा कर दिया था। अगर भूषण जुर्माना भरने से इनकार करते तो उन्हें तीन महीने की जेल हो सकती थी। कोर्ट ने वकालत पर तीन साल का प्रतिबंध लगाने की चेतावनी भी दी थी। मौजूदा मामला क्या और कहां का है दरअसल,मुंबई में सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण को नहीं हटाना बृहन्मुंबई महानगरपालिका(BMC) की कमिश्नर अश्विनी भिड़े को भारी पड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उनकी सैलरी रोकने का आदेश दिया है। साथ ही उन पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट ने अश्विनी भिड़े को अवमानना का नोटिस जारी कर पूछा है कि उनके खिलाफ अदालत के आदेश की जानबूझकर अनदेखी करने पर कार्रवाई क्यों न की जाए। कोर्ट ने BMC अधिकारियों पर अतिक्रमण करने वालों को बचाने का आरोप भी लगाया है। कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज करना पड़ा भारी सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने कहा कि BMC कमिश्नर ने सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के उसके स्पष्ट आदेशों का जानबूझकर पालन नहीं किया। कोर्ट ने इसे 13 नवंबर 2025 और 28 जुलाई 2026 को दिए गए निर्देशों की खुली अवहेलना बताया। अदालत ने कहा कि यह सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई अनदेखी है। इसी आधार पर अश्विनी भिड़े को अवमानना का नोटिस जारी किया गया है। ये भी पढ़ें-अतिक्रमण नहीं हटाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: बीएमसी कमिश्नर की सैलरी रोकी, निगम पर ठोका पांच लाख का जुर्माना 30 दिन की मोहलत देने से भी इनकार सुनवाई के दौरान BMC ने अतिक्रमण हटाने और बाकी काम पूरा करने के लिए 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगा था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट का कहना था कि पहले पुराने आदेशों का पालन किया जाए, उसके बाद ही किसी तरह की राहत मांगी जा सकती है। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार और BMC को निर्देश दिया कि जब तक बस स्टैंड का काम पूरा नहीं होता, तब तक कमिश्नर और उनके निजी स्टाफ की सैलरी जारी न की जाए। अतिक्रमण करने वालों से मिलीभगत का आरोप नवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि आदेशों का पालन न करना पूरी तरह सोची-समझी हरकत लगती है। अधिकारियों की इस कार्रवाई से अतिक्रमण करने वालों को फायदा पहुंच रहा है। कोर्ट ने यह भी कहा कि नगर निगम के अधिकारी अतिक्रमण हटाने के बजाय उन्हें बचाने का काम कर रहे हैं। क्या है पूरा मामला यह मामला मुंबई के बोरीवली इलाके की एक जमीन से जुड़ा है, जिसे BEST बस स्टैंड बनाने के लिए तय किया गया था। इस जमीन पर कब्जे को लेकर BMC और एक निजी डेवलपर के बीच लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली। अगस्त 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने डेवलपर को करीब 3,400 वर्ग मीटर जमीन, जिसमें एक प्रशासनिक इमारत भी शामिल थी, नगर निगम को सौंपने का आदेश दिया था। साथ ही BMC को तीन महीने के भीतर बस स्टैंड का काम पूरा कर उसे चालू करने को कहा गया था। ये भी पढ़ें:'सोशल मीडिया पर नहीं, संसद में आइए': एसआईआर और ईवीएम पर हो जाए आर-पार की बहस, राहुल गांधी को सीतारमण की दो-टूक बार-बार आदेश के बाद भी नहीं हटा अतिक्रमण नवंबर 2025 तक जब जमीन से अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो सुप्रीम कोर्ट ने नगर निगम की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। इसके बाद 28 जुलाई 2026 को अदालत ने एक बार फिर तीन महीने के भीतर अतिक्रमण हटाने और बस स्टैंड का काम पूरा करने का निर्देश दिया। इसके बावजूद जब आदेश पर अमल नहीं हुआ, तो मंगलवार को कोर्ट ने सख्त कदम उठाते हुए कमिश्नर की सैलरी रोकने का फैसला सुनाया। अब अश्विनी भिड़े को अदालत में जवाब देना होगा कि आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 04, 2026, 01:35 IST
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