सन फार्मा पर बड़ी कार्रवाई: असम प्लांट में गंभीर खामियां, आई ड्रॉप्स का उत्पादन बंद करने का आदेश

भारतीय दवा नियामकों ने देश की प्रमुख दवा कंपनी सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज को असम स्थित उसके संयंत्र में आंखों की दवाओं का निर्माण, बिक्री और वितरण तत्काल रोकने का आदेश दिया है। कंपनी की गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली में गंभीर खामियां मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) और असम के औषधि नियंत्रक ने बीते अगस्त में ही संयुक्त रूप से संयंत्र का निरीक्षण किया था। जांच में दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली व्यवस्थाओं में कई गंभीर कमियां सामने आई थीं। 332 बैच वापस मंगाने पर नियामकों ने मांगी जानकारी:इस मामले में सन फार्मा ने जुलाई में एहतियाती कदम उठाते हुए आंखों की दवाओं के करीब 11 ब्रांड बाजार से वापस मंगाए (रिकॉल) थे। नियामकों के दस्तावेजों के मुताबिक, इन दवाओं के कुल 332 बैच रिकॉल किए गए हैं। हालांकि, यह साफ नहीं है कि सभी बैच में गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी या मानकों का उल्लंघन हुआ था या नहीं। वापस मंगाई गई दवाओं में लोटेप्रैड 1% (5 एमएल), नेपालैक्ट ओडी, नेपालैक्ट-जेड, ब्रिनजोटिम और डेपोप्रैड जैसे आई ड्रॉप्स शामिल हैं। इनका इस्तेमाल आंखों की सूजन, संक्रमण और अन्य बीमारियों के इलाज में किया जाता है। दरअसल कुछ मरीजों में आई ड्रॉप के इस्तेमाल के बाद संक्रमण के प्रतिकूल मामले सामने आए थे। जब अधिकारियों ने सीलबंद बोतलों की जांच की, तो वे दूषित पाई गईं। दूषित आई ड्रॉप्स को लेकर पहले भी उठे थे सवाल जून में ऑल इंडिया ऑप्थल्मोलॉजिकल सोसाइटी ने प्रेडमीट आई ड्रॉप्स के कुछ बैचों को लेकर मरीजों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी जारी की थी। एआईओएस के सचिव और डॉक्टर संतोष होनवार के मुताबिक, कुछ मरीजों में संक्रमण के मामले सामने आए थे। सीलबंद बोतलों की जांच में भी नियमों के उल्लंघन की पुष्टि हुई थी। इसके बाद कंपनी ने संबंधित बैच वापस मंगाए थे। ये भी पढ़ें:स्मार्टफोन बाजार में बड़ी त्योहारी छूट: चिप संकट और महंगाई के बावजूद कंपनियों की खास पेशकश; क्या हैं ऑफर कंपनी ने नहीं दिया जवाब पहले भी हो चुकी है कार्रवाई एक अधिकारी के मुताबिक, सन फार्मा ने नियामकों को अनुपालन रिपोर्ट सौंप दी है, जिसकी फिलहाल जांच की जा रही है। हालांकि, कंपनी ने प्लांट पर कार्रवाई और रिकॉल को लेकर सवालों का जवाब नहीं दिया। गौरतलब है कि बीते साल अमेरिकी नियामक यूएस एफडीए ने भी गुणवत्ता और प्रदूषण नियंत्रण में कमियां मिलने के बाद गुजरात स्थित सन फार्मा के हलोल संयंत्र से दवाओं की शिपमेंट पर रोक लगाई थी। वहीं, कंपनी की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, आंखों की दवाओं का उसके घरेलू कारोबार में करीब 3 फीसदी योगदान है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 31, 2026, 03:27 IST
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