Health: त्वचा गोरी करने वाले उत्पाद सेहत के लिए बेहद खतरनाक, WHO बोला- खपत रोकने के लिए बदलनी होगी सोच

त्वचा को गोरा करने वाले उत्पादों के बढ़ते इस्तेमाल और उनसे जुड़ी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) को अब सीधे हस्तक्षेप करना पड़ा है। संगठन ने पारा युक्त स्किन-लाइटनिंग उत्पादों के खिलाफ नया व्यवहारिक नजरिया टूलकिट जारी किया है, जिसका उद्देश्य केवल इन की बिक्री रोकना ही नहीं बल्कि लोगों में इनके प्रति बढ़ती मानसिक और सामाजिक स्वीकार्यता को चुनौती देना है। डब्ल्यूएचओ ने चेतावनी दी है कि ऐसे उत्पाद लंबे समय में दिमागी नुकसान, हार्मोन संबंधी गड़बड़ियां, गर्भस्थ शिशुओं पर असर जैसी गंभीर समस्याओं को जन्म दे रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के अनुसार समस्या केवल अवैध या जहरीले उत्पादों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस सामाजिक सोच से भी जुड़ी है जिसमें गोरी त्वचा को सुंदरता, सफलता और आत्मविश्वास का प्रतीक मान लिया गया है। यही कारण है कि अब वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां केवल प्रतिबंध लगाने के बजाय लोगों के व्यवहार, विज्ञापनों के प्रभाव और सामाजिक दबाव को समझकर मांग कम करने की रणनीति पर काम कर रही हैं। सोशल मीडिया, फिल्म उद्योग और ब्यूटी विज्ञापनों ने इस बाजार को नई गति दी है, जहां गोरी त्वचा को आकर्षण और सफलता से जोड़कर पेश किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़ी संख्या में युवा इन उत्पादों को आत्मविश्वास बढ़ाने या सामाजिक स्वीकार्यता पाने के साधन के रूप में देखने लगे हैं। यही वजह है कि चेतावनियों और प्रतिबंधों के बावजूद इनकी मांग कम नहीं हो रही। पारा का असर शरीर से लेकर पर्यावरण तक डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि कई स्किन-लाइटनिंग क्रीम और लोशन में पारा का इस्तेमाल किया जाता है। पारा एक जहरीली धातु है, जो शरीर में जमा होकर तंत्रिका तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती है। इससे याददाश्त, मानसिक विकास और दिमागी कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है। गर्भवती महिलाओं के मामले में इसका असर गर्भस्थ शिशु तक पहुंच सकता है, जिससे बच्चे के विकास पर खतरा बढ़ जाता है। उनके लगातार प्रयोग से त्वचा में जल्दी झुर्रियां पड़ जाती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इन उत्पादों के रसायन पानी के जरिये बाहर निकलते हैं तो मिट्टी और जल स्रोत भी प्रदूषित होते हैं। इससे पर्यावरण और जलीय जीवन पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। केवल प्रतिबंध नहीं सोच बदलने पर जोर डब्ल्यूएचओ का कहना है कि कई देशों ने पहले भी पारा युक्त उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए, लेकिन केवल कानून से समस्या खत्म नहीं हुई। इसी वजह से संगठन ने नया व्यवहारिक टूलकिट तैयार किया है। इसके जरिये यह समझने की कोशिश की जाएगी कि लोग ऐसे उत्पादों तक कैसे पहुंचते हैं, कौन-सी चीजें उन्हें प्रभावित करती हैं और वे लगातार उनका उपयोग क्यों जारी रखते हैं। डब्ल्यूएचओ का मानना है कि जब तक इन मानसिक और सामाजिक कारणों को नहीं समझा जाएगा, तब तक मांग को कम करना मुश्किल रहेगा। अन्य वीडियो

#World #International #Skin #SkinLighteningProducts #WorldHealthOrganization #MercuryToxicity #HealthRisks #SkinWhitening #BeautyIndustry #BeautyStandards #EnvironmentalPollution #Skincare #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: May 07, 2026, 01:22 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




Health: त्वचा गोरी करने वाले उत्पाद सेहत के लिए बेहद खतरनाक, WHO बोला- खपत रोकने के लिए बदलनी होगी सोच #World #International #Skin #SkinLighteningProducts #WorldHealthOrganization #MercuryToxicity #HealthRisks #SkinWhitening #BeautyIndustry #BeautyStandards #EnvironmentalPollution #Skincare #VaranasiLiveNews