The Bonus Market Update: शेयर बाजार में कमजोरी का सिलसिला बरकरार; सेंसेक्स 500 अंक गिरा, निफ्टी 23700 से फिसला
घरेलू शेयर बाजार में बिकवाली का सिलसिला जारी है। सोमवार की गिरावट के बाद मंगलवार को भी प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक लाल निशान पर कारोबार करते दिखे। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 525.44 अंक गिरकर 75,489.84 पर आ गया, वहीं निफ्टी 164.5 अंक गिरकर 23,651.35 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार मेंइंफोसिस और एशियन पेंट्स में 3% तक की गिरावट दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट दर्ज की गई। विदेशी फंड्स की लगातार हो रही निकासी और अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता पर छाए संकट ने निवेशकों के भरोसे को कमजोर कर दिया है। बाजार का हाल: सेंसेक्स और निफ्टी धड़ाम मंगलवार के शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का सेंसेक्स 525.44 अंक गोता लगाकर 75,489.84 के स्तर पर आ गया। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 164.5 अंक फिसलकर 23,651.35 पर पहुंच गया। इससे पहले सोमवार को भी बाजार में भारी कोहराम देखा गया था, जब सेंसेक्स 1,312.91 अंक और निफ्टी 360.30 अंक का भारी नुकसान उठाकर बंद हुए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के साथ युद्धविराम के संकट में होने और समझौते की उम्मीदें धूमिल होने के बाद मंगलवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 35 पैसे गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 95.63 पर पहुंच गया, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया। गिरावट के मुख्य कारण: ट्रंप का बयान और महंगा क्रूड इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतें और वैश्विक तनाव जिम्मेदार हैं: कच्चे तेल में उबाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) 0.93 प्रतिशत की उछाल के साथ 105.2 डॉलर प्रति बैरल के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। ट्रंप ने ठुकराया शांति प्रस्ताव: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को कचरा बताते हुए खारिज कर दिया है। ट्रंप ने कहा है कि युद्धविराम अपने सबसे कमजोरस्तर पर है और अब यह लाइफ सपोर्टपर है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकोंने बाजार पर दबाव बढ़ाते हुए सोमवार को 8,437.56 करोड़ रुपये के शेयरों की भारी बिकवाली की है। एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर के अनुसार, अमेरिका-ईरान के मौजूदा संघर्ष से वैश्विक धारणा प्रभावित हो रही है, जिससे शेयर बाजार में जोखिम लेने की क्षमता कम हो गई है और भारी अस्थिरता बनी हुई है। सेक्टोरल असर: टेक शेयरों में सबसे ज्यादा नुकसान सेंसेक्स की 30 प्रमुख कंपनियों में से सबसे ज्यादा गिरावट आईटी और वित्तीय शेयरों में देखी गई। टीसीएस (TCS), इंफोसिस, टेक महिंद्रा, एचसीएल टेक, अदाणी पोर्ट्स और बजाज फिनसर्व सबसे बड़े लूजर्स (नुकसान वाले शेयर) रहे। दूसरी तरफ, इस चौतरफा गिरावट के बीच भारती एयरटेल और एनटीपीसी के शेयरों ने बढ़त हासिल कर निवेशकों को मामूली राहत दी। वैश्विक बाजारों का रुख एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी और शंघाई का कंपोजिट इंडेक्स गिरावट के साथ लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। इसके विपरीत, जापान का निक्केई 225 और हांगकांग का हैंग सेंग इंडेक्स बढ़त में रहे। अमेरिकी बाजार सोमवार को सकारात्मक दायरे में बंद हुए थे। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में संघर्ष खत्म होने की कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आती, तब तक निवेशकों के मन में अनिश्चितता बनी रहेगी। संघर्ष की अवधि और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आने वाले समय में भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: May 12, 2026, 09:26 IST
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