संस्कृत भारत की आत्मा और ज्ञान परंपरा का आधार : राज्यपाल

कहा, युवाओं को संस्कृत दैनिक जीवन में अपनाने के लिए करें प्रेरितसंवाद न्यूज एजेंसीनूरपुर (कांगड़ा)। संस्कृत में निहित ज्ञान को आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और कृत्रिम मेधा से जोड़कर विश्व के सामने प्रस्तुत करने की आवश्यकता है। यह बात शनिवार को राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने मलकवाल स्थित वीवीएम इंस्टीट्यूट ऑफ नर्सिंग में संस्कृत भारती की दो दिवसीय अखिल भारतीय गोष्ठी के शुभारंभ पर कही। उन्होंने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया।राज्यपाल ने कहा कि संस्कृत भारत की सभ्यता, संस्कृति और समृद्ध ज्ञान परंपरा का आधार है। युवाओं को इसे केवल परीक्षा का विषय न मानकर अपनी सांस्कृतिक पहचान और ज्ञान के भंडार के रूप में अपनाना चाहिए। वेद, उपनिषद, रामायण और महाभारत जैसे ग्रंथों में जीवन मूल्यों, दर्शन और विज्ञान से जुड़ा ज्ञान उपलब्ध है। उन्होंने आर्यभट्ट, पाणिनि, सुश्रुत और भास्कराचार्य जैसे विद्वानों के योगदान को शिक्षा व्यवस्था में उचित स्थान देने पर भी जोर दिया।उन्होंने कहा कि संस्कृत साहित्य और प्राचीन पांडुलिपियों पर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शोध करने के साथ उनके संरक्षण को बढ़ावा देना चाहिए। हिमाचल की स्थानीय बोलियों में संस्कृत का गहरा प्रभाव है। वर्ष 2019 में प्रदेश में संस्कृत को दूसरी राजभाषा का दर्जा दिया गया था। हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सत प्रकाश बंसल ने गोष्ठी को विविधता में एकता का प्रतीक बताया। इस दौरान सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई गई। कार्यक्रम में संस्कृत भारती के पदाधिकारी और पूर्व मंत्री राकेश पठानिया सहित कई गणमान्य उपस्थित रहे।

#SanskritIsTheSoulOfIndiaAndTheFoundationOfItsKnowledgeTradition:Governor #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 31, 2026, 20:31 IST
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