पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट: कर्नाटक के दावे के बाद केरल में कार्रवाई; क्या है पंपों पर रेड का पूरा मामला?

तिरुवनंतपुरम में पेट्रोल प्यूल की शुद्धता को लेकर इन दिनों सरगर्मी अचानक काफी ज्यादा बढ़ गई है। केरल के सिविल सप्लाई मिनिस्टर अनूप जैकब ने राज्य के चार प्रमुख जिलों में स्थित पेट्रोल पंपों की अचानक जांच कराने के सख्त आदेश जारी कर दिए हैं। पड़ोसी राज्य कर्नाटक की तरफ से यह गंभीर आरोप लगाया गया था कि वहां पेट्रोल में तय सीमा से काफी ज्यादा इथेनॉल मिलाया जा रहा है, जिसके बाद केरल सरकार ने भी यहां एहतियात बरतनी शुरू कर दी है। किन-किन जिलों में होगी पेट्रोल पंपों की ताबड़तोड़ जांच केरल सरकार ने साफ कर दिया है कि भले ही अभी तक राज्य के अंदर पेट्रोल में तय सीमा से अधिक इथेनॉल मिलने का कोई पुख्ता मामला सामने नहीं आया है, लेकिन दूसरे राज्य में चल रहे विवाद को देखते हुए कोई ढिलाई नहीं बरती जाएगी। तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम, कोझिकोड और कन्नूर जिलों के अलग-अलग पेट्रोल पंपों से पेट्रोल के नमूने यानी सैंपल्स कलेक्ट किए जाएंगे। इन सैंपल्स को तुरंत टेस्टिंग के लिए लैबोरेटरी भेजा जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि आम जनता को मिलने वाले पेट्रोल की क्वालिटी पूरी तरह से मानकों के अनुरूप है या नहीं। किस स्तर के अधिकारियों को मिली है पावर इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई के लिए साल 2014 की एक पुरानी सरकारी अधिसूचना का सहारा लिया जा रहा है, जिसे सेंट्रल मोटर स्पिरिट एंड हाई स्पीड डीजल ऑर्डर, 2005 के तहत जारी किया गया था। इस कानूनी व्यवस्था के जरिए सिविल सप्लाई और कंज्यूमर अफेयर्स कमिश्नर से लेकर तालुक सप्लाई ऑफिसर तक के तमाम जिम्मेदार अधिकारियों को यह अधिकार मिला हुआ है कि वे किसी भी पेट्रोल पंप पर औचक निरीक्षण कर सकते हैं। मंत्री अनूप जैकब ने बहुत स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि जांच के दौरान किसी भी स्तर पर कोई मिलावट या नियम का उल्लंघन पाया जाता है, तो दोषियों के खिलाफ बिना किसी रियायत के कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। यह भी पढ़ें:'संसद में बिना रुकावट हो पीएम मोदी और राहुल की बहस': कपिल सिब्बल ने रखी मांग, गृह मंत्री से क्या सवाल पूछा कर्नाटक में इथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर आखिर विवाद क्यों बढ़ा यह पूरा विवाद तब खड़ा हुआ जब कर्नाटक सरकार के खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों के मंत्री रिजवान अर्शद ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह सनसनीखेज दावा किया कि राज्य में पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा तयशुदा 20 फीसदी की सीमा से कहीं ज्यादा यानी करीब 31.2 प्रतिशत तक पाई गई है। बंगलूरू, कोलार, चिक्काबल्लापुरा, बेंगलुरु ग्रामीण, रामनगर, मंगलूरू और तुमकुरु जैसे इलाकों से जुटाए गए सैंपल्स की जांच के बाद कर्नाटक सरकार ने इन बड़ी कंपनियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग की है। हालांकि, सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने इन सभी दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनकी तरफ से सप्लाई किया जाने वाला ई-20 पेट्रोल ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स की तय स्पेसिफिकेशन्स (IS 17021) के बिल्कुल मुताबिक है। तेल कंपनियों ने कर्नाटक सरकार के सैंपलिंग तरीकों पर क्या उठाए सवाल इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने शुक्रवार को एक संयुक्त बयान जारी कर कर्नाटक सरकार के इन सभी आरोपों को गलत बताया। तेल कंपनियों का कहना है कि अक्तूबर 2026 के दौरान जिस तरीके से सैंपलिंग और टेस्टिंग की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया, वह पूरी तरह से तय कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं के नियमों पर खरी नहीं उतरती है। कंपनियों का साफ कहना है कि वे देश भर में मानक गुणवत्ता वाला ईंधन ही सप्लाई कर रहे हैं और उनके पास इस बात के पूरे तकनीकी प्रमाण मौजूद हैं कि उनका ईंधन हर तरह के सरकारी और औद्योगिक पैमानों को पूरा करता है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Nov 07, 2026, 14:39 IST
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