ईडी: मेक्सिको बॉर्डर से यूएस में अवैध एंट्री कराने का केस, क्या है इमिग्रेशन-क्लियरेंस फिक्सर और डंकी रूट?

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के जालंधर जोनल कार्यालय ने हाल ही में दिल्ली के एक टिकटिंग एजेंट, तरुण खोसला को डंकी रूट केसके सिलसिले में 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के तहत गिरफ्तार किया है। यह मामला फरवरी 2025 में अमेरिका से डिपोर्ट (वापस भेजे गए) किए गए भारतीयों से जुड़ा है। पीएमएलए कोर्ट ने उसे 30 अक्तूबर तक ईडी की कस्टडी में भेज दिया है। यह केस मेक्सिको बॉर्डर के रास्ते अवैध रूप से अमेरिका में एंट्री कराने से जुड़ा है। 'इमिग्रेशन-क्लियरेंस फिक्सर' और डंकी रूटके जरिए युवाओं को अमेरिका में गैर कानूनी तरीके से एंट्री दिलाई जाती थी। ईडी ने यह जांच पंजाब और हरियाणा पुलिस द्वारा दर्ज की गई कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। ये एफआईआर बीएनएस, 2023 (पहले का आईपीसी, 1860) और 'इमिग्रेशन एक्ट', 1983 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई थीं। यह मामला तब सामने आया जब फरवरी 2025 में 300 से अधिक भारतीय नागरिकों को अमेरिका से डिपोर्ट कर दिया गया, क्योंकि वे मेक्सिको बॉर्डर के रास्ते अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल हुए थे। जांच से पता चला है कि जो लोग अमेरिका जाना चाहते थे, उन्हें एजेंटों और बिचौलियों ने कानूनी तरीके से भेजने का झूठा वादा देकर बहकाया था। इसके बजाय, उन्हें 'डंकी रूट' से भेजा गया—यानी स्थानीय 'डंकर्स' (मानव तस्करों) और माफिया की मदद से कई दक्षिण/मध्य अमेरिकी देशों की सीमाओं को खतरनाक रास्तों से अवैध रूप से पार कराया गया। ऐसे लोगों से लगभग 30 लाख से 60 लाख रुपये तक वसूले गए थे। इससे पहले, इस मामले में 09.07.2025 और 11.07.2025 को 19 जगहों पर तलाशी ली गई थी। इस दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज, रिकॉर्ड, डिजिटल डिवाइस और अन्य सामग्री बरामद हुई, जिसमें निकारागुआ और इथियोपिया के फर्जी इमिग्रेशन स्टैम्प और वीजा स्टैम्प भी शामिल थे। इसके अलावा, 15.12.2025 को ईडी ने लगभग 5.41 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) कर लिया था। इनमें कृषि भूमि, आवासीय और व्यावसायिक परिसर, और बैंक खातों में जमा राशि शामिल है। ये संपत्तियां उन एजेंटों द्वारा अवैध रूप से लोगों को अमेरिका भेजने से कमाए गए 'अपराध की कमाई' से बनाई गई थीं। इसके बाद, ईडी ने 18.12.2025 और 19.12.2025 को पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में कई जगहों पर तलाशी ली। इस दौरान, तरुण खोसला के ठिकानों से 4.62 करोड़ रुपये नकद, लगभग 5.9 किलोग्राम सोने की ईंटें और सिक्के, और लगभग 313 किलोग्राम चांदी की ईंटें (जिनकी कुल कीमत 19.14 करोड़ रुपये है) जब्त की गईं। इसके अलावा, वहां से कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए गए। साथ ही, अन्य जगहों से तीसरे पक्ष के 50 से अधिक असली पासपोर्ट, डायरियां, लेन-देन के रिकॉर्ड, संपत्ति के दस्तावेज और डिजिटल डिवाइस भी बरामद किए गए।जांच से पता चला है कि तरुण खोसला 'डंकी रूट' नेटवर्क का एक मुख्य संचालक था। वह पंजाब और हरियाणा के कई एजेंटों के साथ मिलकर काम करता था। ये एजेंट अमेरिका जाने के इच्छुक लोगों से पासपोर्ट और पैसे इकट्ठा करके दिल्ली में तरुण खोसला को सौंप देते थे। इसके बाद, वह दक्षिण अमेरिका के देशों—जैसे गुयाना, सूरीनाम, इक्वाडोर, अल साल्वाडोर आदि के लिए वीजा और हवाई टिकट का इंतजाम करता था। साथ ही, वह इन लोगों को अवैध और खतरनाक रास्तों से अमेरिकी सीमा तक पहुंचाने में मदद करता था। 'डंकी रूट' के जरिए यात्रा करने वाले हर व्यक्ति के लिए, कौन सा रास्ता अपनाया जाएगा और कितना खर्च आएगा, यह तय करने में तरुण खोसला की मुख्य भूमिका होती थी। ये है अमेरिका में अवैध रूप से प्रवेश का रास्ता आरोपी के जब्त किए गए मोबाइल फोन से ऐसी चैट मिली हैं जिनसे पता चलता है कि वह 'इमिग्रेशन-क्लियरेंस फिक्सर' के तौर पर काम करता था। एक विदेशी संपर्क के साथ उसकी चैट से पता चलता है कि वह विदेशी हवाई अड्डों पर भी काम संभालता था। इसमें इमिग्रेशन क्लियरेंस के लिए पैसे लेना, टिकट का इंतज़ाम करना, यात्रियों को संभालना और अमेरिकी डॉलर में भुगतान लेना शामिल था। 'ओके टू बोर्ड' जैसे निर्देश देना और एयरलाइन या इमिग्रेशन कर्मचारियों के साथ तालमेल बिठाना यह साबित करता है कि यात्रा के इंतज़ामों पर उसका पूरा नियंत्रण था। जांच में यह भी सामने आया है कि तरुण खोसला 'डंकी रूट' के इस अवैध धंधे में एक मुख्य व्यक्ति है। वह लोगों को अवैध तरीके से अमेरिका भेजने के लिए कई इंतज़ाम करता था, जैसे दक्षिण अमेरिकी देशों के लिए वीज़ा क्लियरेंस, जाली 'येलो फीवर' वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट बनवाना, टिकट बुक करना और 'डंकर्स' (लोगों को अवैध तरीके से ले जाने वाले एजेंट) को मैनेज करना। उसकी मेक्सिको में 'माइक', ब्राज़ील में 'अली' और मेक्सिको में ही 'क्रिस्टी' जैसे विदेशी एजेंटों से बातचीत होती थी। ये लोग 'डंकी रूट' के ज़रिए लोगों को सीमा पार कराने और उससे जुड़े पैसों के लेन-देन का काम संभालते थे। उसकी प्रोप्राइटरशिप फर्म 'बीजे इंटरनेशनल' के बैंक खाते में वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच 414 बार नकद जमा किए गए, जिनकी कुल रकम 30.38 करोड़ रुपये है। अब तक की जांच से पता चला है कि यह एक बहुत ही व्यवस्थित नेटवर्क था। पिछले कई बर्षोंसे यह नेटवर्क आम और भोले-भाले लोगों को फंसाकर, उन्हें अवैध तरीके से विदेश भेजने का काम कर रहा था। इसके लिए वे पूरी यात्रा का इंतजाम और तालमेल बिठाते थे और लोगों से भारी कमीशन वसूलते थे।

#IndiaNews #National #Ed #MexicoBorder #Immigration #DunkiRoute #VaranasiLiveNews

  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Oct 27, 2026, 12:32 IST
पूरी ख़बर पढ़ें »




ईडी: मेक्सिको बॉर्डर से यूएस में अवैध एंट्री कराने का केस, क्या है इमिग्रेशन-क्लियरेंस फिक्सर और डंकी रूट? #IndiaNews #National #Ed #MexicoBorder #Immigration #DunkiRoute #VaranasiLiveNews