Credit Card Cash Withdrawal: क्रेडिट कार्ड से कैश निकालना पड़ सकता है महंगा, भारी ब्याज से बिगड़ सकता है बजट

भारतीय मध्यम वर्ग के बटुए में अब क्रेडिट कार्ड सिर्फ एक प्लास्टिक मनी नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। आरबीआई के ताजा आंकड़े इसकी तस्दीक करते हैं। फरवरी 2025 में जहां क्रेडिट कार्ड से खर्च 1.68 लाख करोड़ रुपये था, वहीं फरवरी 2026 में यह 6% बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि, दिसंबर 2025 के 2.05 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें कुछ गिरावट देखी गई है, लेकिन कार्ड का बढ़ता चलन साफ है। क्रेडिट कार्ड हमें 'अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें' की आजादी तो देता है, लेकिन इस चमक-दमक के बीच एक ऐसा कदम है, जो आपके वित्तीय स्वास्थ्य को गंभीर रूप से बीमार कर सकता है और वह है क्रेडिट कार्ड से नकद निकासी। क्या कहते हैं आंकड़े फरवरी 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो POS और ई-कॉमर्स के जरिए लेनदेन का हिस्सा सबसे बड़ा है, लेकिन एक बड़ी राशि 'कैश विड्रॉल' के रूप में भी निकाली गई है। लोग अक्सर आपात स्थिति में या छोटे खर्चों के लिए एटीएम से क्रेडिट कार्ड डालकर पैसे निकाल लेते हैं। फरवरी 2026 में 364.26 करोड़ रुपये निकाले गए, दिसंबर 2025 में क्रेडिट कार्ड से कैश विड्रॉल का यह आंकड़ा 393.14 करोड़ रुपये था। सुनने में यह एक सुविधा लगती है, लेकिन असल में यह आपकी जेब पर पड़ने वाला सबसे महंगा बोझ है। ये भी पढ़ें:ETF:सोने-चांदी के बाहर भी है ईटीएफ की दुनिया, बैंकिंग से लेकर विदेशी बाजार में निवेश का मौका क्यों है यह एक 'महंगा सौदा' भारी-भरकम ब्याज दर: जब आप क्रेडिट कार्ड से खरीदारी करते हैं, तो आपको 45-50 दिनों का ब्याज मुक्त समय मिलता है। लेकिन नकद निकासी के मामले में यह नियम लागू नहीं होता। जिस क्षण आप एटीएम से कैश निकालते हैं, उसी दिन से ब्याज शुरू हो जाता है। ब्याज दर सालाना 36% से 48% तक हो सकती है। कैश एडवांस फीस: हर बार कैश निकालने पर बैंक आपसे एक निश्चित शुल्क वसूलता है, जो आमतौर पर निकाली गई राशि का 2.5% से 3% होता है (न्यूनतम 300 से 500 रुपये तक)। यानी अगर आपने सिर्फ 1000 रुपये निकाले, तो भी आपको 500 रुपये तक का शुल्क देना पड़ सकता है। सिबिल स्कोर पर बुरा असर: क्रेडिट कार्ड से नकद निकालना बैंक की नजर में आपकी क्रेडिट हंगर यानी पैसों की अत्यधिक तंगी को दर्शाता है। इससे आपका सिबिल स्कोर नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकता है, जिससे भविष्य में होम लोन या कार लोन मिलना मुश्किल हो जाता है। क्या है विकल्प यदि आपको कैश की सख्त जरूरत है, तो क्रेडिट कार्ड के बजाय ये विकल्प बेहतर हैं: आपातकालीन फंड: हमेशा 3-6 महीने का खर्च अलग रखें। पर्सनल लोन: क्रेडिट कार्ड कैश के मुकाबले पर्सनल लोन की ब्याज दरें काफी कम होती हैं। बाय नाउ पे लेटर (BNPL): छोटे खर्चों के लिए BNPL का उपयोग करें।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 27, 2026, 04:36 IST
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