रिसर्च: इंसान ही नहीं जानवर भी मनाते हैं अपनों की मौत का शोक, साथी के बिछड़ने पर वर्षों तक नहीं भूलते दर्द
विज्ञान का मानना था कि किसी अपने के जाने पर रोना या शोक मनाना केवल इंसान के जीवन का हिस्सा है, लेकिन यूटा स्टेट यूनिवर्सिटी में न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. सारा फ्रीमेन की प्रयोगशाला में रखे बेहद ठंडे फ्रीजर के भीतर कुछ ऐसे सुराग मौजूद हैं, जो विज्ञान की इस पुरानी धारणा को चुनौती दे रहे हैं। कोयोट्स के दिमाग में मिल रहे शोक के संकेत डॉ. फ्रीमेन की टेबल पर रखे कांच के स्लाइडों पर एक मादा कोयोट (अमेरिका में पाया जाने वाला भेड़िये जैसा जीव) के दिमाग के बेहद महीन टुकड़े रखे हैं। यह दिमाग उस मादा कोयोट का है, जिसके जीवनसाथी की मौत हो चुकी थी। शोधकर्ता इन नमूनों में न्यूरोलॉजिकल बदलावों की जांच कर रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि साथी की मौत के बाद जानवरों के दिमाग में शोक की स्थिति कैसे बनती है और उनका शरीर इस नुकसान पर कैसी प्रतिक्रिया देता है। शुरुआती अध्ययनों से पता चला है कि साथी के बिछड़ने पर कोयोट्स के दिमाग में तनाव का स्तर अचानक बढ़ जाता है और ये न्यूरोलॉजिकल बदलाव वर्षों तक रह सकते हैं। जीवनभर साथ निभाते हैं कोयोट्स कोयोट्स को अक्सर अकेले घूमने वाले खूंखार शिकारी जानवरों के रूप में देखा जाता है, लेकिन वे बेहद वफादार जीवनसाथी साबित होते हैं। कोयोट्स अपने पार्टनर के साथ जीवनभर रहते हैं, एक-दूसरे की देखभाल करते हैं, भोजन साझा करते हैं और बच्चों का पालन-पोषण मिलकर करते हैं। चिम्पांजी फ्लिंट ने मां की मौत के बाद छोड़ दिया था खाना-पीना (1972) विश्व प्रसिद्ध प्राइमेटोलॉजिस्ट जेन गुडॉल ने देखा था कि जब मादा चिम्पांजी फ्लो की मौत हुई, तो उसके बेटे फ्लिंट ने खाना-पीना और दूसरों से मिलना पूरी तरह बंद कर दिया। मां की मौत के कुछ ही हफ्तों बाद उसी जगह पर फ्लिंट ने भी दम तोड़ दिया। मादा चिम्पांजी पेन्सी के अंतिम पलों में साथियों ने दिखाई संवेदना (2008) ब्रिटेन के एक वाइल्डलाइफ पार्क में जब बूढ़ी चिम्पांजी पेन्सी की मौत होने वाली थी, तब उसके तीन साथी चिम्पांजियों ने अंतिम पलों में उसे सहलाया। मौत के बाद उसकी बेटी घंटों शव के पास बैठी रही और बाकी साथी रातभर बेचैन रहे। हाथियों और ओरका व्हेल में भी दिखा अपनों के बिछड़ने का दर्द 2003 में अफ्रीकी हाथियों को अपनी मृत झुंड-प्रमुख (मैट्रिआर्क) के शव के पास बार-बार लौटते और सूंड से उसे सहलाते हुए देखा गया। वहीं, 2018 में टाहलेक्वाह नाम की ओरका व्हेल अपने मृत बच्चे के शव को सिर पर रखकर 17 दिनों तक समुद्र में तैरती रही। प्रेयरी वोल्स में साथी की मौत से बदल जाता है व्यवहार न्यूरोसाइंस के अध्ययनों में पाया गया कि जब एक जोड़ीदार प्रेयरी वोल (एक प्रकार का कृंतक, जो जीवनभर एक ही पार्टनर के साथ रहता है) अपने साथी को खो देता है, तो उसमें डोपामाइन और ऑक्सीटोसिन जैसे रसायनों का संतुलन बिगड़ जाता है। इसके बाद वह तैरने या भागने की कोशिश भी छोड़ देता है। ये भी पढ़ें:एआई की जगह सुपर इंटेलिजेंस: ट्रंप के आदेश से सरकारी महकमों में बदली भाषा; टेक दिग्गजों ने भी अपनाया नया नाम जानवरों में दुख की भावनाओं के मिल रहे वैज्ञानिक प्रमाण अब कोयोट्स, हाथियों, चिम्पांजियों, व्हेल और कुत्तों में भी शोक और दुख से जुड़े स्पष्ट व्यवहार देखे जा चुके हैं। साथी की मौत के बाद कई जानवर घंटों तक उसके शव के पास पहरा देते हैं। ये घटनाएं बताती हैं कि अपनों को खोने का दर्द केवल इंसानों तक सीमित नहीं है, बल्कि जानवर भी अपने करीबियों से गहरा भावनात्मक जुड़ाव रखते हैं।
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- Source: www.amarujala.com
- Published: Nov 04, 2026, 01:47 IST
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