Iran: जब ट्रंप ने लिया युद्ध का फैसला, व्हाइट हाउस ने बताया साहसिक कदम

इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को युद्ध के लिए मनाने की खातिर 11 फरवरी को ओवल ऑफिस पहुंचे। अमेरिका व इस्राइल कई हफ्तों से ईरान के खिलाफ सैन्य हमले करने पर गुपचुप तरीके से विचार कर रहे थे। लेकिन उससे पहले, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने ईरानियों के साथ उनके परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर बातचीत शुरू की थी। इस्राइली नेता यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि नई कूटनीतिक कोशिशों से उनकी योजना कमजोर न पड़े। लगभग तीन घंटे तक दोनों नेताओं ने युद्ध की संभावनाओं और हमले की संभावित तारीखों पर चर्चा की। हालांकि ईरान के साथ समझौते की संभावना कम थी, लेकिन उस पर भी चर्चा हुई। कुछ दिनों बाद, ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया कि वह कूटनीतिक मार्ग को लेकर संशय में हैं। पत्रकारों ने जब पूछा कि क्या वह ईरान में सरकार बदलना चाहते हैं, तो ट्रंप ने कहा, 'लगता है कि यह सबसे अच्छी बात होगी, जो हो सकती है।' जब ईरान से सभी तरह की वार्ताएं बेनतीजा साबित हुईं, तो दो हफ्ते बाद, ट्रंप ने ईरान पर हमला बोल दिया। उन्होंने इस्राइल के साथ मिलकर एक बड़ी सैन्य बमबारी को मंजूरी दी, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता की तुरंत मौत हो गई, ईरानी रिहायशी इमारतों और सैन्य परमाणु स्थल पर हमला हुआ, देश में अफरा-तफरी मच गई और पूरे इलाके में हिंसा फैल गई। ट्रंप ने कहा है कि ईरान को पूरा मौका दिया गया, लेकिन अब अमेरिका हफ्तों तक चलने वाले हमले के लिए तैयार है। वेनेजुएला के नेता निकोलस मादुरो को हटाने के बाद ट्रंप का आत्मविश्वास भी काफी बढ़ गया था। ईरान पर लगातार हमला करने के ट्रंप के फैसले की यह कहानी उन लोगों की बातों पर आधारित है, जिनमें इलाके के राजनयिक, इस्राइली और अमेरिकी प्रशासन के अधिकारी, ट्रंप के सलाहकार, कांग्रेस के सांसद और रक्षा व खुफिया विभाग के अधिकारी शामिल हैं। ईरान पर हमला करने का अमेरिकी फैसला नेतन्याहू के लिए एक जीत थी, जो महीनों से ट्रंप को इसके लिए मनाने की कोशिश कर रहे थे कि उन्हें ईरान पर हमला करना चाहिए। सोमवार को एक बयान में, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप ने एक ऐसे खतरे का सामना करने का 'साहसी फैसला' लिया है, जिसका सामना करने के लिए पहले कोई भी राष्ट्रपति तैयार नहीं था। ट्रंप के करीबी लोगों में से कुछ ने ही सैन्य कार्रवाई का विरोध किया। उसी बैठक में, ट्रंप के शीर्ष सैन्य सलाहकार जनरल डैन केन ने कहा कि युद्ध से अमेरिकियों को काफी नुकसान हो सकता है। पर ट्रंप ने लोगों को बताया कि उनके सैन्य सलाहकार जनरल केन ने कहा था कि ईरान के खिलाफ कोई भी सैन्य कार्रवाई 'आसानी से जीती जा सकने वाली चीज होगी।' जानकारों का कहना है कि 24 फरवरी को तथाकथित आठ लोगों के समूह (हाउस और सीनेट के नेता और खुफिया समितियों के प्रमुख) के साथ बैठक के दौरान, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसका कोई जिक्र नहीं किया कि ट्रंप प्रशासन सरकार बदलने पर विचार कर रहा है। तीन दिन बाद, टेक्सास के कॉर्पस क्रिस्टी में एक कार्यक्रम के लिए उड़ान भरते समय, ट्रंप ने लगातार हमले का आदेश दिया, जिसकी शुरुआत सर्वोच्च नेता की हत्या से होगी। उन्होंने कहा, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी को मंजूरी मिल गई है।' व्हाइट हाउस ने जोर देकर कहा कि ईरान के साथ उसकी कूटनीतिक बातचीत महज नाटक नहीं थी। पर पिछले महीने यह साफ हो गया कि ऐसे समझौते की कभी गुंजाइश नहीं थी, जो ट्रंप, नेतन्याहू और ईरानी नेताओं-सबको खुश कर सके—या जो युद्ध को कुछ महीनों से ज्यादा टाल सके। मध्य जनवरी में जब ट्रंप ने ईरान में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों के समर्थन में पहली बार ईरान पर हमला करने की धमकी दी थी, तो पेंटागन पश्चिम एशिया में लंबा युद्ध छेड़ने की हालत में नहीं था। उधर इस्राइल भी सैन्य अभियान के लिए तैयार नहीं था, उसे तैयारी के लिए समय चाहिए था। 14 जनवरी को, नेतन्याहू ने ट्रंप को फोन करके कहा कि वे महीने के आखिर तक कोई भी सैन्य हमला न करें। ट्रंप मान गए। रुबियो ने 16 फरवरी को बुडापेस्ट में रिपोर्टरों से कहा, 'हमें यह समझना होगा कि ईरान पर आखिरकार शिया मौलवी ही राज करते हैं और ये लोग धर्मशास्त्र के आधार पर नीति से जुड़े फैसले लेते हैं। इसलिए, ईरान के साथ समझौता करना मुश्किल है।' संदेश साफ था: भले ही बातचीत ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने के बारे में थी, लेकिन इसका मकसद ईरान के नेतृत्व को हटाना भी हो सकता है। राष्ट्रपति के सलाहकारों को यह साफ था कि वह किसी तरह के सैन्य हमले के बारे में गंभीरता से सोच रहे थे। सवाल यह था कि हमला कितना बड़ा था और असल में यह क्या हासिल करने के लिए होगा। 18 फरवरी को, वॉशिंगटन में वेंस; रुबियो; सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ; और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूजी विल्स, सैन्य योजना पर चर्चा करने के लिए सिचुएशन रूम में ट्रंप के साथ इकट्ठा हुए। बैठक के दौरान, जनरल केन ने कई विकल्पों पर बात की। वेंस, जो व्यक्तिगत रूप से हमलों के खिलाफ लग रहे थे, ने कहा कि सीमित हमला गलत होगा। अगर अमेरिका ईरान पर हमला करने वाला है, तो उसे 'बड़ा और तेज हमला करना चाहिए।' बैठक से पहले, ट्रंप का झुकाव छोटे हमले की तरफ था, जिसके बाद अगर ईरान अपना परमाणु संवर्धन नहीं छोड़ता, तो बड़ा हमला किया जाता। लेकिन वेंस की बातें लोगों को समझ में आईं। और आने वाले दिनों में, और भी अधिकारी इस विचार से सहमत हुए कि अमेरिका और इस्राइल को मिलकर न सिर्फ ईरानी मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम पर, बल्कि खुद नेतृत्व पर भी निशाना साधना चाहिए। सीआईए ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई के किसी हमले में मारे जाने की कई योजनाएं बनाई। उन्होंने कई संभावित नतीजे बताए, क्योंकि कई वजहों से एजेंसी के लिए यह अंदाजा लगाना मुश्किल था कि क्या हो सकता है। सैन्य कार्रवाई का विरोध करने वाले कम ही थे। एक अपवाद टकर कार्लसन थे, जिन्हें ट्रंप ने कहा कि वह हमले के खतरों को समझते हैं, लेकिन उनके पास इस्राइल के हमले में शामिल होने के अलावा कोई चारा नहीं है। व्हाइट हाउस ने कुछ सांसदों की इस मांग को भी नजरअंदाज कर दिया कि ट्रंप ईरान के खिलाफ हमले शुरू करने के लिए संसद से मंजूरी लें। असल में, अमेरिका और इस्राइल जिनेवा में तय बातचीत से एक दिन पहले ही संभावित हमले पर चर्चा कर रहे थे। व्हाइट हाउस ने ईरानियों को अपने परमाणु संवर्धन के सपने छोड़ने का आखिरी मौका देने के लिए युद्ध एक दिन के लिए टाल दिया। फिर इसे एक और दिन शुक्रवार तक के लिए टाल दिया गया, जिसमें अंधेरे में तेहरान पर हमला करने का विचार था। आखिरकार समय एक बड़ी खुफिया जानकारी के बाद तय हुआ। अयातुल्ला खामनेई की गतिविधियों पर करीब से नजर रखने वाली सीआईए को पता चला कि सर्वोच्च नेता शनिवार सुबह तेहरान में अपने घर में रहने की योजना बना रहे थे। वरिष्ठ ईरानी असैन्य और सैन्य नेता भी उसी जगह, उसी समय इकट्ठा होने वाले थे। सीआईए ने यह खुफिया जानकारी इस्राइलियों को दी, और दोनों देशों के नेताओं ने दिन के उजाले में उनकी हत्या करके युद्ध शुरू करने का फैसला किया। चार ईरानी अधिकारियों के अनुसार, हालांकि इस बात के पर्याप्त संकेत थे कि अमेरिकी हमले की तैयारी कर रहे थे, लेकिन उनका मानना था कि दिन के उजाले में हमला होने की संभावना नहीं है। यह शनिवार की सुबह थी, ईरान में कामकाजी हफ्ते की शुरुआत, जब बच्चे स्कूल में थे और लोग काम पर जा रहे थे। अधिकारियों के अनुसार, अयातुल्ला खामनेई ने अपने करीबी लोगों से कहा कि युद्ध की स्थिति में, वह अपनी जगह पर रहकर शहीद होना पसंद करेंगे, बजाय इसके कि इतिहास उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में आंके, जो छिप गया हो। जब वरिष्ठ नेता बैठक के लिए इकट्ठा हुए, तो वह परिसर के दूसरे हिस्से में अपने कार्यालय में थे। उन्होंने बैठक खत्म होने पर ब्रीफिंग के लिए कहा। लेकिन ठीक उसी वक्त मिसाइलों से हमले शुरू हो गए। (साथ में जूलियन ई. बार्न्स, टायलर पेजर, वर्ड वोंग, एरिक श्मिट और रोनेन बर्गमैन )

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 08, 2026, 06:45 IST
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