महिला आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज: भाजपा का प्रदर्शन, कांग्रेस का पलटवार; दोनों पक्षों ने लगाए गंभीर आरोप

लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े संविधान (131वें संशोधन) विधेयक को पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के बाद राजस्थान की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जयपुर में इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया, वहीं कांग्रेस ने भी सरकार पर महिला आरक्षण लागू न करने को लेकर सवाल उठाए। इस घटनाक्रम ने महिला आरक्षण को फिर से प्रमुख राजनीतिक मुद्दा बना दिया है। जयपुर में भाजपा की जन आक्रोश महिला पदयात्रा महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भाजपा ने जयपुर में “जन आक्रोश महिला पदयात्रा” आयोजित की। इस पदयात्रा का नेतृत्व भाजपा महिला मोर्चा ने किया, जिसमें बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम को भाजपा कार्यालय से शहीद स्मारक तक निकाला जाना था। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने पदयात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। महिला मोर्चा की प्रदेशाध्यक्ष राखी राठौड़ इसके नेतृत्व में आगे बढ़ रही थीं। हाथों में बैनर और नारेबाजी के साथ महिला कार्यकर्ता मार्च कर रही थीं। पुलिस ने रास्ते में रोका, कार्यकर्ताओं ने जताया विरोध पदयात्रा आगे बढ़ी तो पुलिस ने कमिश्नरेट के सामने बैरिकेडिंग लगाकर जुलूस को रोक दिया। इसके बाद मौके पर हंगामे की स्थिति बन गई। महिला कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि उनकी आवाज दबाने का प्रयास किया जा रहा है। पढ़ें-नीमराणा में वेतन बढ़ोतरी की मांग पर बवाल:सैकड़ों महिला श्रमिक धरने पर बैठीं, पुलिस ने छह को हिरासत में लिया प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे महिला आरक्षण के समर्थन में और अपने अधिकारों की मांग को लेकर एकत्रित हुई हैं। पुलिस कार्रवाई के विरोध में कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। कांग्रेस पर भाजपा नेताओं के तीखे बयान इस अवसर पर भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। प्रदेश उपाध्यक्ष अलका मूंदड़ा ने कांग्रेस के रुख को “घृणित” बताते हुए कहा कि जनता इसका जवाब देगी। प्रदेश मंत्री एकता अग्रवाल ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसकी तुलना रावण से की। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों का हनन करने वालों को जनता सबक सिखाएगी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विपक्ष पर हमला सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि 17 अप्रैल का दिन ऐतिहासिक बन सकता था, लेकिन विपक्ष ने इसे “काला पन्ना” बना दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक शासन करने के बावजूद महिलाओं को उनका उचित अधिकार नहीं दिया। उन्होंने कहा कि अब समय बदल रहा है और महिलाएं अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुकी हैं। उनके अनुसार, आने वाले समय में महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी और मजबूत होगी। दीया कुमारी ने भी साधा निशाना डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने भी विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि जिन्होंने महिलाओं का अधिकार छीना है, उन्हें जनता के बीच जाने का नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने महिलाओं से लोकतांत्रिक तरीके से ऐसे दलों का विरोध करने की अपील की और महिला अधिकारों के समर्थन में एकजुट रहने का आह्वान किया। विधेयक को नहीं मिला पर्याप्त समर्थन गौरतलब है कि लोकसभा में इस बिल को पारित कराने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी, लेकिन इसके पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। पर्याप्त समर्थन न मिलने के कारण यह विधेयक पारित नहीं हो सका। विधेयक में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने तथा महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रस्ताव शामिल था। टीकाराम जूली ने सरकार से पूछे सवाल दूसरी ओर राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने महिला आरक्षण कानून को लेकर राज्य और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में संसद द्वारा पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम को अब तक लागू नहीं किया जाना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है।जूली ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा प्रदेश की जनता को जवाब देने से बच रहे हैं और दिल्ली से तय एजेंडे के अनुसार काम कर रहे हैं। पढ़ें-राजस्थान पेट्रो जोन को मिलेगी रफ्तार:मुख्यमंत्री ने 18 एमओयू पर हस्ताक्षर किए, निवेशकों के लिए बढ़ेंगे अवसर महिला नेतृत्व और आरक्षण पर कांग्रेस के आरोप टीकाराम जूली ने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वाली भाजपा अपने भीतर महिला नेतृत्व को दरकिनार करती रही है। उन्होंने इसका उदाहरण वसुंधरा राजे को किनारे किए जाने को बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य सरकार पर महिला आरक्षण को लेकर केवल राजनीतिक बयानबाजी करने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। परिसीमन और जनगणना की शर्तों पर सवाल जूली ने आरोप लगाया कि सरकार ने जानबूझकर परिसीमन और जनगणना की शर्तें जोड़कर इस कानून को लागू होने से रोका है। उन्होंने कहा कि जब तक जातिगत जनगणना नहीं होगी, तब तक ओबीसी, एससी और एसटी वर्ग की महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व नहीं मिल सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस नेतृत्व, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल हैं, लगातार इस कानून को तुरंत लागू करने की मांग कर रहे हैं। महिला आरक्षण फिर बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा जयपुर में हुए विरोध प्रदर्शन और कांग्रेस की प्रतिक्रिया के बाद महिला आरक्षण का मुद्दा फिर से राजनीतिक केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में यह विषय राजस्थान सहित राष्ट्रीय राजनीति में बहस का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 20, 2026, 14:41 IST
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