भारतीय सांस्कृतिक विरासत हमारी पहचान : प्रो़ दानपति

अयोध्या। युवा महोत्सव के माध्यम से विद्यार्थियों को एक ऐसा सामूहिक अवसर एवं मंच प्रदान करना है, जहां वे अपनी संगीत, कलात्मक, रूपांकन, रंग मंचीय एवं साहित्यिक क्षमता व प्रतिभाओं का प्रदर्शन कर सकें। आज युवाओं को अपने क्षेत्र, राज्य एवं देश की सांस्कृतिक विरासत को जानना बहुत ही आवश्यक है, क्योंकि यही हमारी पहचान है। ये बातें प्राचार्य प्रो़ दानपति तिवारी ने साकेत महाविद्यालय में युवा महोत्सव के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में कहीं।दो दिवसीय युवा महोत्सव में अतिथियों का स्वागत करते हुए सांस्कृतिक परिषद के अध्यक्ष डॉ. असीम त्रिपाठी ने बताया कि युवा महोत्सव के तहत विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। 27 अप्रैल को भव्य वार्षिक सांस्कृतिक समारोह के साथ इस संपूर्ण आयोजन का समापन होगा। महोत्सव के प्रथम दिन भाषण, एकल काव्य पाठ और पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया।मुख्य नियंता डॉ. बीके. सिंह, छात्र कल्याण अधिकारी प्रो. कुमुद रंजन, वरिष्ठ आचार्य प्रो. अशोक कुमार मिश्र, प्रो. अशोक कुमार राय एवं डॉ. नंदराम निषाद ने संबोधित किया। चालन सांस्कृतिक परिषद की वरिष्ठ सदस्य डॉ. पूनम जोशी, उपाध्यक्ष डॉ. नीता पांडेय एवं सदस्य डॉ. बुशरा खातून ने किया। अंत में परिषद की सचिव डॉ. सुरभि पाल ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस समारोह में प्रो. रचना सिन्हा, प्रो. अंशू त्रिपाठी, डॉ. शशि कुमार, प्रो. शिखा शर्मा, डॉ. सरला शुक्ला, डॉ. निधि मिश्रा, सुमधुर, डॉ. रीता दूबे सहित अन्य की मौजूदगी रही।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Apr 16, 2026, 13:40 IST
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