Health Insurance: स्वास्थ्य बीमा का दावा पास कराना होगा आसान, नई तकनीक की मदद लेकर तेजी से निपटेंगे मामले

मेडिकल इमरजेंसी के वक्त अस्पताल के इलाज से ज्यादा तनाव अक्सर मरीजों और उनके परिजनों को हेल्थ इंश्योरेंस का 'क्लेम पास' कराने को लेकर होता है। लेकिन अब पॉलिसीधारकों की इस सबसे बड़ी परेशानी का स्थायी समाधान होने जा रहा है। सरकार द्वारा हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को किफायती बनाने के प्रयासों के बीच, अब उद्योग के प्रतिनिधि निकाय 'जनरल इंश्योरेंस काउंसिल' ने अपना पूरा ध्यान दावा निपटान को पारदर्शी और तेज बनाने पर लगा दिया है। इलाज के दौरान ग्राहकों को नहीं करना पड़ेगा घंटों इंतजार अब ग्राहकों को क्लेम के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ेगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई, सरकार के नए 'नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज' (एनएचसीएक्स) और उन्नत डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए बीमा कंपनियों और अस्पतालों के बीच सीधा और मजबूत तालमेल बनाया जा रहा है। इन नई तकनीकों से न केवल पेपरलेस और रियल-टाइम क्लेम अप्रूवल मिलेगा, बल्कि ग्राहकों को अपने दावे का सटीक स्टेटस ट्रैक करने की सुविधा भी मिलेगी। इसका मुख्य उद्देश्य मेडिकल इमरजेंसी के दौरान होने वाली अनिश्चितता को खत्म करना और हेल्थ इंश्योरेंस को आम आदमी के लिए एक वास्तविक और भरोसेमंद सपोर्ट सिस्टम बनाना है। इस बारे में उद्योग के जानकार क्या कह रहे हैं, आइए विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं। दावामें तेजी लाने और पारदर्शिता को मजबूत करने पर जोर हेल्थ इंश्योरेंस इकोसिस्टम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (जीआईसी ) के रणनीतिक पार्टनरशिप डॉ. एस. प्रकाश ने अमर उजाला डॉटकॉम के साथ बातचीत में बताया कि, हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी छूट रिटेल हेल्थ इंश्योरेंस को किफायती बनाने की है, साथ ही छोटे शहरों में इसका विस्तार करने की है, जहां अभी भी काफी कम पहुंच है। लेकिन उद्योग का जोर अब क्लेम प्रोसेस में तेजी लाने और पारदर्शिता को मजबूत करने पर है। वे कहते हैं, ग्राहक जागरुकता के साथ इंश्योरेंस कंपनियां और हेल्थकेयर सेवाप्रदाता नई टेक्नोलॉजी में निवेश को बढ़ा रहे हैं, जो दावों के निपटान में अधिक पारदर्शिता और क्षमता का विस्तार करेगी। हम अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच बेहतर सहयोग के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं, जिससे यह पक्का हो सके कि अस्पताल के कर्मचारियों और पॉलिसीहोल्डर्स दोनों को कवरेज, अप्रूवल और दावे के स्टेटस के बारे में पूरी जानकारी हो। इससे समय कम लगता है साथ ही मेडिकल इमरजेंसी के दौरान ग्राहकों की परेशानी कम होगी। स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत भी एक बड़ा मुद्दा डॉ. प्रकाश कहते है, स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत भी एक बड़ा मुद्दा है, जिसके लिए खर्च में बढ़ोतरी केवल अस्पतालों के टैरिफ स्तर पर नहीं, बल्कि इलाज की प्रक्रिया के दौरान भी होती है। यहां पर स्टैंडर्ड इलाज की गाइडलाइंस को अपनाने और इंश्योरेंस कंपनियों और अस्पतालों के बीच मजबूत तालमेल एक अहम भूमिका निभा सकता है, इसलिए काउंसिल इस ओर भी ध्यान दे रही है। इमरजेंसी के दौरान इंश्योरेंस को एक भरोसेमंद सपोर्ट सिस्टम बने जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के कार्यकारी कमेटी के सदस्य एवं स्टार हेल्थ के सीईओ आनंद रॉय कहते हैं,व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी हटाना बड़ा बदलाव है, जिससे लाखों भारतीयों के लिए इंश्योरेंस सस्ता हो गया है। इसकी वजह से पहली बार पॉलिसी लेने वाले लोग सिस्टम से जुड़ रहे हैं, उद्योग दावों के निपटान के तेज करने, उनमें पारदर्शिता लाने और उपभोक्ता अनुभवों को और बेहतर बनाने की कोशिशों को तेज किया जाने की जरूरत है । हमारा फोकस आसान पॉलिसी कम्युनिकेशन, डिजिटल क्लेम ट्रैकिंग और तेज अप्रूवल पर है ताकि यह पक्का हो सके कि मेडिकल इमरजेंसी के दौरान इंश्योरेंस को एक भरोसेमंद सपोर्ट सिस्टम के तौर पर देखा जाए। अस्पतालों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर जोर सकरात्मकता को बनाए रखने के लिए जनरल इंश्योरेंस काउंसिल, इंश्योरेंस कंपनियों और अस्पतालों के बीच सहयोग को मजबूत कर रही है। स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल, अस्पतालों का कॉमन एम्पैनलमेंट, ट्रांसपेरेंट हॉस्पिटल बिलिंग और एनचसीएक्स नेशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज (एनएचसीएक्स) भारत सरकार द्वारा एक डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू किया गया है, जिसमें स्वास्थ्य बीमा एजेंट (स्वास्थ्य बीमा दावे) की प्रक्रिया को तेज करने, रेजॉलूशन और पेपरलेस बनाने के लिए बीमा, पोर्टफोलियो और टीपीए को शामिल किया गया है) प्लेटफॉर्म के जरिए मजबूत डेटा इंटीग्रेशन से दावों के निपटान में दिक्कत कम होगी, भरोसा मजबूत होगा और यह पक्का होगा कि सिस्टम सस्टेनेबल बना रहे। आखिर में, दावा निपटान ही कस्टमर के भरोसे की नींव है- कैशलेस नेटवर्क को बढ़ाकर, प्रक्रिया को ऑटोमेट करके और दावों के दौरान कम्युनिकेशन को बेहतर बनाकर, हम हेल्थ इंश्योरेंस को सभी के लिए अधिक भरोसेमंद और आसान बनाने पर लगातार काम कर रहे हैं। तकनीक और एआई के इस्तेमाल से निपटान प्रक्रिया होगी आसान जनरल इंश्योरेंस काउंसिल की कार्यकारी कमेटी के सदस्य व आदित्य बिड़ला हेल्थ इंश्योरेंस के सीईओ मयंक बथवाल बताते हैं, हेल्थ इंश्योरेंस को किफायती बनाने के साथ उद्योग का फोकस दावों के निपटान में तेजी लाना और आसान बनाने पर कर रही है। टेक्नोलॉजी और एआई (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) का इस्तेमाल करते हुए दावों के निपटान की प्रोसेसिंग में तेजी, बेहतर तरीके से विसंगति का पता लगाना और दावों के स्टेटस का सही समय दिखाने में अहम भूमिका निभा रहा हैं। उनका कहना है कि डिजिटल सेवाएं जो ग्राहकों के दस्तावेजों को जमा करने और क्लेम ट्रैक करने की सुविधा देती हैं, इससे मेडिकल इमरजेंसी के दौरान अनिश्चितता को काफी कम कर सकती हैं।

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  • Source: www.amarujala.com
  • Published: Mar 28, 2026, 20:35 IST
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